
काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार को आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड और मलबे के सैलाब के बाद राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर मृतकों की संख्या सैकड़ों में पहुंच चुकी है, जबकि एक हजार से अधिक लोग अब भी लापता हैं। गुरुवार शाम तक नेपाल में 289 मौतें और 644 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई, जबकि चीन के तिब्बत स्थित ग्यिरोंग क्षेत्र में तीन लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की पुष्टि की गई है। तिब्बत में लापता लोगों में 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है, इसलिए मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या और बढ़ने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में इस आपदा के पीछे भूकंप के बजाय हिमालय में ग्लेशियर के एक हिस्से के अचानक ढहने और उसके साथ भारी मात्रा में चट्टान, बर्फ और मलबा नदी में गिरने को मुख्य कारण माना जा रहा है। इस विशाल मलबे ने पानी के साथ मिलकर विनाशकारी बहाव पैदा किया, जिसने नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में इमारतों, पुलों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को कुछ ही मिनटों में तबाह कर दिया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नदी में मलबे से बने अस्थायी अवरोध टूटने पर दूसरी या तीसरी विनाशकारी लहर भी आ सकती है। आपदा का बड़ा केंद्र चीन नियंत्रित तिब्बत का ग्यिरोंग पोर्ट बना है, जो नेपाल और तिब्बत के बीच पर्यटकों तथा व्यापार के लिए महत्वपूर्ण सीमा मार्ग है। सोशल मीडिया पर सामने आए और समाचार एजेंसियों द्वारा सत्यापित वीडियो में कीचड़, पानी और चट्टानों का विशाल सैलाब बहुमंजिला इमारतों को बहाते और लोगों को जान बचाकर भागते दिखा। चीन ने यहां बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव दल तैनात किए हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों और कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं की है। नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नेपाल में लापता विदेशियों में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। एक अपडेट में 177 भारतीय, 63 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 25 कनाडाई नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी गई है। एक टूर ऑपरेटर के मुताबिक, कैलाश मानसरोवर की ओर जा रहे पर्यटकों के एक समूह ने बाढ़ आने से कुछ मिनट पहले अपना आखिरी वीडियो भेजा था। बताया गया कि समूह तिब्बत सीमा के पास भूस्खलन हटने का इंतजार कर रहा था। इसके बाद उनसे संपर्क टूट गया। प्रभावित इलाकों में कई स्थानों पर इतनी मोटी मिट्टी और मलबा जमा है कि मकानों और अन्य संरचनाओं के निशान तक दिखाई नहीं दे रहे हैं। नेपाल और चीन दोनों ओर सेना, पुलिस, दमकल और अन्य बचाव एजेंसियां हेलीकॉप्टरों और भारी मशीनरी की मदद से मलबे में दबे लोगों को खोज रही हैं। क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के कारण कई इलाकों तक केवल हवाई मार्ग से पहुंचा जा रहा है। अधिकारियों ने नदियों के किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा संभावित दूसरी बाढ़ की चेतावनी को गंभीरता से लेने की अपील की है। इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से बदलते ग्लेशियरों और जलवायु जोखिमों को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे हिमालय में बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर अस्थिर हो रहे हैं और भविष्य में इस तरह की अचानक बाढ़ की घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है।

