
मुंबई। किफायती आवास को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखकर एक सशक्त और टिकाऊ आवासीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के उद्देश्य से केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और नीति आयोग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘रीइमेजिनिंग अफोर्डेबल हाउसिंग– फ्रॉम स्कीम टू सस्टेनेबल इकोसिस्टम’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए), बृहन्मुंबई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकर ने किया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा किफायती आवास के क्षेत्र में अपनाई गई नवाचारी पहल, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और सुधारों पर विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव सत्येंद्र सिंह, संयुक्त सचिव कुलदीप नारायण सहित विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों, वित्तीय संस्थानों और नीति विशेषज्ञों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
2030 तक 5 लाख से अधिक पुनर्वास आवास का लक्ष्य
डॉ. महेंद्र कल्याणकर ने बताया कि मुंबई महानगर क्षेत्र को विकास केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से एसआरए ने वर्ष 2030 तक 5,09,873 पुनर्वास आवास तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत दिसंबर 2026 तक 90,264, दिसंबर 2027 तक 1,48,219, दिसंबर 2028 तक 2,44,356, दिसंबर 2029 तक 3,61,026 तथा दिसंबर 2030 तक कुल 5,09,873 आवास उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने बताया कि लंबित पुनर्वास परियोजनाओं को गति देने के लिए अभय योजना, संयुक्त भागीदारी मॉडल और निविदा के माध्यम से डेवलपर नियुक्ति जैसे विकल्प लागू किए गए हैं। साथ ही प्रशासनिक बाधाओं को कम करने, निर्णय प्रक्रिया को तेज करने और झुग्गीवासियों के अधिकारों को अधिक सुरक्षित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुंबई में 50 एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले बड़े भूखंडों पर क्लस्टर पुनर्विकास मॉडल के तहत झुग्गी पुनर्वास योजनाएं लागू की जा रही हैं। पहले चरण में बांद्रा पूर्व का बेहरामपाड़ा, अंधेरी का मजासवाड़ी और ओशिवरा का बेहराम बाग चुने गए हैं। इन परियोजनाओं को गति देने के लिए एमएमआरडीए, म्हाडा और सिडको जैसी एजेंसियों के साथ संयुक्त भागीदारी के आधार पर कार्य किया जा रहा है।
पात्र झुग्गीवासियों को निःशुल्क पुनर्वास आवास
महाराष्ट्र की झुग्गी पुनर्वास योजना क्रॉस-सब्सिडी मॉडल पर आधारित है। इसके तहत पात्र झुग्गीवासियों को स्थायी पुनर्वास आवास निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इसके बदले डेवलपर को प्रोत्साहन स्वरूप अतिरिक्त बिक्री योग्य एफएसआई प्रदान किया जाता है। डॉ. कल्याणकर ने बताया कि 1 जनवरी 2000 से पहले अस्तित्व में आए पात्र आवासों के निवासियों को 300 वर्गफुट का निःशुल्क आवास दिया जाता है। वहीं 1 जनवरी 2000 से 1 जनवरी 2011 के बीच बने पात्र आवासों के निवासियों को 2.50 लाख रुपये के शुल्क पर 300 वर्गफुट का पुनर्वास फ्लैट उपलब्ध कराया जाता है।
डिजिटल सेवाओं से प्रशासन हुआ अधिक पारदर्शी
एसआरए ने मई 2024 से डिजिटल परिवर्तन अभियान शुरू किया है। अब तक 22 डिजिटल सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं। इनमें ऑनलाइन शिकायत, परियोजना अनुमोदन, अनापत्ति प्रमाणपत्र, उत्तराधिकार पंजीकरण, भूमि अधिग्रहण और रियल-टाइम पत्राचार ट्रैकिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा सेल्फ सर्विस कियोस्क, व्हाट्सएप सेवा और मराठी, हिंदी व अंग्रेज़ी में उपलब्ध एआई आधारित ‘मित्र वाणी’ चैटबॉट भी नागरिकों के लिए शुरू किया गया है। कंप्यूटरीकृत लॉटरी प्रणाली से पुनर्वास आवासों का आवंटन अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
‘नेत्रम’ प्रणाली से अतिक्रमण पर निगरानी
मुंबई में अवैध अतिक्रमण पर निगरानी के लिए प्रधानमंत्री गतिशक्ति अभियान के अंतर्गत ‘नेत्रम’ नामक डिजिटल प्रणाली विकसित की गई है। उपग्रह चित्रों की मदद से नए अतिक्रमणों की पहचान कर संबंधित एजेंसियों को तत्काल सूचना दी जाती है।
राष्ट्रीय मंच पर महाराष्ट्र की आवास नीति की प्रस्तुति
सम्मेलन के ‘लैंड एंड अर्बन प्लानिंग रिफॉर्म्स’ तकनीकी सत्र में डॉ. कल्याणकर ने महाराष्ट्र की अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी और क्लस्टर डेवलपमेंट पॉलिसी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण और सीमित भूमि संसाधनों को देखते हुए बेहतर भूमि नियोजन और पुनर्विकास के माध्यम से आवास उपलब्धता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
धारावी पुनर्विकास में मानव-केंद्रित विकास पर जोर
डॉ. कल्याणकर ने सम्मेलन में धारावी पुनर्विकास परियोजना को मानव-केंद्रित शहरी विकास का उदाहरण बताते हुए कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए आधुनिक और समावेशी शहरी बस्ती विकसित करना है। उन्होंने बताया कि धारावी में कार्यरत 17 हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुनर्विकास के दौरान इन-सिटू आर्थिक पुनर्वास पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय उद्योग और रोजगार सुरक्षित रह सकें।

