
मुंबई। वेस्टर्न रीजनल साइबर सेल ने मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामलों में लोगों को फंसाकर उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देने वाले एक साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने सांताक्रूज के 55 वर्षीय आईटी कंसल्टेंट को मनी लॉन्ड्रिंग के एक कथित फर्जी मामले में फंसाकर उससे 1.67 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराने की कोशिश की। हालांकि, पीड़ित ने रकम ट्रांसफर नहीं की और समय रहते साइबर पुलिस से संपर्क कर दिया। पुलिस ने जांच के दौरान अपराध से जुड़े 27 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, पांच डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस, अलग-अलग कंपनियों के 613 सिम कार्ड, दो पासबुक, दो एटीएम कार्ड और 34 लाख रुपये नकद सहित अन्य सामान जब्त किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संजय हेरालाल शाह, ऋषि रामचंद्र मीणा, नौशाद अली दिलशाद अली, मोहम्मद खालिद हफीजुद्दीन सैफी और जागेश्वर महतो के रूप में हुई है। इनके साथ एक महिला और एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब गिरोह के कथित मास्टरमाइंड और इसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। मामला अप्रैल 2026 का है। शिकायतकर्ता आईटी कंसल्टिंग का काम करते हैं। पुलिस के मुताबिक, उन्हें 2 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 के बीच लगातार अनजान नंबरों से फोन आने लगे। फोन करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक बैंक खाता खोला गया है और उस खाते से मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लाखों रुपये का लेन-देन हुआ है। आरोपियों ने दावा किया कि इस मामले में शिकायतकर्ता की संलिप्तता के सबूत मिले हैं और जांच चल रही है। इसके बाद साइबर ठगों ने शिकायतकर्ता को गिरफ्तारी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दी। खुद को वास्तविक पुलिस अधिकारी साबित करने के लिए आरोपियों ने वीडियो कॉल भी किए। ठगों ने पुलिस के लोगो वाले इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज और सुप्रीम कोर्ट के नाम एवं मुहर वाले कथित दस्तावेज भी शिकायतकर्ता को भेजे, ताकि वह उनकी बातों पर विश्वास कर सके।
आरोपियों ने शिकायतकर्ता से उसके बैंक खातों और आर्थिक लेन-देन से संबंधित जानकारी हासिल की। इसके बाद उसे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.67 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। ठगों ने दावा किया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम उसे वापस कर दी जाएगी। हालांकि, शिकायतकर्ता को संदेह हुआ और उसने कोई रकम ट्रांसफर करने के बजाय वेस्टर्न रीजनल साइबर सेल से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद वेस्टर्न साइबर सेल के पुलिस इंस्पेक्टर संदीप पाटिल के नेतृत्व में जांच शुरू की गई। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में गठित टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक पूनम जाधव, नितिन गच्छे, अमोल माली, सविता कदम, अंजलि वाणी, शंकर पाटिल, विजयकुमार घोरपड़े तथा पुलिस उपनिरीक्षक दीपक तायडे और अविनाश नलावडे शामिल रहे। जांच के दौरान पुलिस ने उन बैंक खातों की जानकारी जुटाई, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम को स्थानांतरित करने और उसे ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था। बैंक खाताधारकों और उनके संपर्कों की जांच के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से सात संदिग्धों को हिरासत में लिया।
पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि संजय शाह कथित तौर पर गिरोह के सदस्यों को सिम कार्ड और ओटीपी उपलब्ध कराता था। एक महिला ने कथित तौर पर ऋषि मीणा की मदद से अपराध से जुड़े करीब 50.60 लाख रुपये को ठिकाने लगाने में भूमिका निभाई। नौशाद अली कथित तौर पर पीड़ितों से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। इसी तरह मोहम्मद खालिद पर कथित तौर पर पीड़ितों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देने वाले कॉल को रूट करने का आरोप है। वहीं जागेश्वर महतो ने कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त करीब 1.17 करोड़ रुपये नकद को बैंक खातों के माध्यम से हासिल करने और अपने साथियों की मदद से रकम को ठिकाने लगाने में भूमिका निभाई। पुलिस ने जांच के दौरान अलग-अलग बैंक खातों में 34 लाख रुपये फ्रीज किए हैं। इसके अलावा 27 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, पांच डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस, 613 सिम कार्ड, दो पासबुक और दो एटीएम कार्ड भी बरामद किए गए हैं। पुलिस अब जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर गिरोह के अन्य सदस्यों तथा इसके संचालन के तरीके का पता लगा रही है। गिरफ्तार आरोपियों को बांद्रा की स्थानीय अदालत में पेश किया गया। अदालत ने चार आरोपियों को 11 अगस्त तक और शेष तीन आरोपियों को 17 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूछताछ में गिरोह के कथित मास्टरमाइंड समेत कई अन्य संदिग्धों की भूमिका सामने आई है। बाकी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

