
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी भविष्य के विकास के तीन प्रमुख आधारस्तंभ हैं। इन क्षेत्रों में महाराष्ट्र को बड़े पैमाने पर कुशल मानवबल तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अनुरूप महाराष्ट्र क्वांटम टेक्नोलॉजी मिशन को प्रभावी ढंग से लागू कर राज्य में मजबूत क्वांटम इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह बात आई-हब क्वांटम टेक्नोलॉजी फाउंडेशन द्वारा आयोजित क्वांटम टेक्नोलॉजी फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम के समापन अवसर पर ऑनलाइन संबोधन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और डेटा आधारित अर्थव्यवस्था अब उच्च गति वाले डेटा प्रोसेसिंग के युग में प्रवेश कर रही है। आने वाले समय में एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक वैश्विक प्रतिस्पर्धा का आधार बनेंगी। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की तरह भारत के पास क्वांटम तकनीक में भी प्रशिक्षित मानव संसाधन के बल पर वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का अवसर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के लिए लगभग 6,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसी तर्ज पर महाराष्ट्र सरकार भी अपना स्वतंत्र क्वांटम मिशन चला रही है। पहले चरण में 500 प्रशिक्षकों को तैयार किया जाएगा और इसके बाद 5,000 से अधिक क्वांटम प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि क्वांटम तकनीक से इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अंतरिक्ष, उद्योग और रक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आएगा। इसलिए विद्यार्थियों और शिक्षकों को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप अभी से तैयार करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आईआईएसईआर, सी-डैक, टीआईएफआर, आईआईटी मुंबई, सीओईपी और वीएनआईटी जैसी संस्थाओं में क्वांटम तकनीक से संबंधित उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। इन सभी संस्थानों की विशेषज्ञता को एक साथ जोड़कर महाराष्ट्र के क्वांटम मिशन को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने प्रशिक्षण के लिए विकसित पाठ्यक्रम, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) तथा ‘चंद्र’ और ‘सूर्य’ चैटबॉट्स की भी सराहना करते हुए कहा कि ये विद्यार्थियों को क्वांटम तकनीक की मूलभूत अवधारणाएं समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

