
मुंबई। महाराष्ट्र में फर्जी डॉक्टरों पर लगाम लगाने और नागरिकों को पंजीकृत चिकित्सकों की सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिए महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (महाराष्ट्र वैद्यकीय परिषद) ने ‘नो युवर डॉक्टर’ (Know Your Doctor) नामक क्यूआर कोड आधारित नई प्रणाली शुरू की है। इस प्रणाली के माध्यम से कोई भी नागरिक क्यूआर कोड स्कैन करके तुरंत यह जानकारी प्राप्त कर सकेगा कि संबंधित डॉक्टर विधिवत पंजीकृत है या नहीं। बुधवार को विधानसभा में सोलापुर जिले में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े प्रश्न का उत्तर देते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्तमान में लगभग 1 लाख 40 हजार पंजीकृत डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि हर वर्ष करीब 12,824 नए एमबीबीएस डॉक्टर चिकित्सा क्षेत्र में शामिल हो रहे हैं। मंत्री मुश्रीफ ने कहा कि एमबीबीएस, स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा, आयुर्वेद, यूनानी, बीएएमएस, बीएचएमएस, डेंटल तथा अन्य मान्यता प्राप्त चिकित्सा शाखाओं में आवश्यक पंजीकरण के बिना चिकित्सा व्यवसाय करने वाले लोगों को फर्जी डॉक्टर माना जाता है। राज्य में वर्ष 2015 से 2026 के बीच ऐसे मामलों में 89 अपराध दर्ज किए गए हैं। उन्होंने बताया कि फर्जी चिकित्सा व्यवसाय रोकने के लिए सरकार द्वारा गठित समिति की सिफारिशों के अनुसार जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय तथा तहसीलदार की अध्यक्षता में तालुका स्तरीय समितियां कार्यरत हैं। इन समितियों में अब जनप्रतिनिधियों को भी शामिल कर पुनर्गठन किया जाएगा, जिससे निगरानी और प्रभावी हो सके। मंत्री ने कहा कि अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय करने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की सिफारिशों के अनुसार दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की जेल या 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स अधिनियम के तहत दो वर्ष तक की कैद या जुर्माना, तथा बार-बार अपराध करने पर 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम में आवश्यक संशोधनों के संबंध में राज्य सरकार सकारात्मक है और नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस विषय पर विधानसभा में विधायक विजय देशमुख, राहुल कुल और राहुल पाटील ने भी उप-प्रश्नों के माध्यम से चर्चा में भाग लिया।



