HomeHealth & Fitnessक्लाउड किचन से लेकर बड़े होटलों तक सभी पर एफडीए की नजर

क्लाउड किचन से लेकर बड़े होटलों तक सभी पर एफडीए की नजर

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे का सख्त संदेश: उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से समझौता बर्दाश्त नहीं

मुंबई। महाराष्ट्र में नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण और मिलावटमुक्त भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने राज्यभर के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैंटीन, बेकरी, मिठाई दुकानों, क्लाउड किचन और ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के लिए व्यापक खाद्य सुरक्षा अनुपालन आदेश जारी किया है। बुधवार को एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एफडीए द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य के सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा उससे संबंधित सभी नियमों और विनियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। यह आदेश होटल, रेस्टोरेंट, उपाहारगृह, ढाबे, कैंटीन, कैफेटेरिया, क्विक सर्विस रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, केटरिंग यूनिट, मिठाई दुकान, बेकरी, फूड कोर्ट, जूस बार, क्लाउड किचन, सेंट्रल किचन, चेन रेस्टोरेंट और ऑनलाइन फूड एग्रीगेटर्स पर लागू होगा। एफडीए ने हाल के निरीक्षणों और विशेष अभियानों के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं पाई थीं। इनमें अस्वच्छ वातावरण में भोजन तैयार करना, इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल का दोबारा उपयोग, बिना स्वास्थ्य जांच वाले कर्मचारियों द्वारा खाद्य सामग्री संभालना, तापमान नियंत्रण में लापरवाही, घटिया पैकेजिंग सामग्री का उपयोग तथा ग्राहकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं कराना शामिल है। प्रशासन का कहना है कि ऐसी गतिविधियां सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए खतरा हैं। आदेश के तहत अब प्रत्येक खाद्य प्रतिष्ठान के लिए वैध एफएसएसएआई लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य होगा और उसका प्रमाणपत्र प्रतिष्ठान में प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना होगा। सभी प्रतिष्ठानों को स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। खाद्य पदार्थों को संभालने वाले कर्मचारियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र और एफओएसटीएसी (FoSTaC) प्रशिक्षण भी अनिवार्य किया गया है। एफडीए ने सुरक्षित खाद्य प्रबंधन के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार कच्चे और पके हुए खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखना होगा, ‘फर्स्ट इन फर्स्ट आउट’ (FIFO) प्रणाली का पालन करना होगा, गर्म और ठंडे खाद्य पदार्थों के लिए निर्धारित तापमान बनाए रखना होगा तथा केवल लाइसेंसधारी आपूर्तिकर्ताओं से ही कच्चा माल खरीदना होगा। ग्राहकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए एफडीए ने सभी खाद्य प्रतिष्ठानों के लिए सुरक्षित पेयजल निःशुल्क उपलब्ध कराना अनिवार्य कर दिया है। किसी भी ग्राहक को बोतलबंद पानी खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक प्रतिष्ठान में “सुरक्षित पेयजल यहां निःशुल्क उपलब्ध है” का बोर्ड लगाना भी आवश्यक होगा। बड़े रेस्टोरेंट और चेन फूड आउटलेट्स को अब अपने मेन्यू में खाद्य पदार्थों की कैलोरी, पोषण मूल्य और एलर्जी संबंधी जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। वहीं समाचार पत्र, छपे हुए कागज या खाद्य उपयोग के लिए अनुपयुक्त सामग्री में भोजन परोसने अथवा पैक करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। एफडीए ने इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल (यूज्ड कुकिंग ऑयल) के पुनः उपयोग पर भी सख्ती दिखाई है। आरयूसीओ (RUCO) कार्यक्रम के तहत ऐसे तेल के पुनः उपयोग या बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और क्लाउड किचन को भी लाइसेंस नंबर, कैलोरी और एलर्जन संबंधी जानकारी ग्राहकों को उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा जिन खाद्य व्यवसायों का वार्षिक कारोबार 50 करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें एफएसएसएआई मान्यता प्राप्त संस्था से हर वर्ष खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (एफएसएमएस) का ऑडिट कराना अनिवार्य होगा।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि सुरक्षित भोजन प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है। खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन करने वाले प्रतिष्ठानों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना, अभियोजन, लाइसेंस निलंबन या रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यभर में विशेष निरीक्षण अभियान, अनुपालन जांच और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। नागरिक खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की शिकायत एफडीए हेल्पलाइन 1800222365, एफएसएसएआई हेल्पलाइन 1800114000, FoSCoS मोबाइल ऐप अथवा संबंधित विभागीय कार्यालय में दर्ज करा सकेंगे। “सुरक्षित भोजन – निरोगी महाराष्ट्र” के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रशासन ने खाद्य व्यवसायियों और नागरिकों से सहयोग की अपील की है।

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