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महाराष्ट्र में 36,585 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक ऋणमाफी, 56 लाख किसानों को मिलेगा लाभ: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

महिला किसानों को कानूनी दर्जा देने वाले विधेयक सहित 10 विधेयक मानसून सत्र में होंगे प्रस्तुत

मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को घोषणा की है कि राज्य सरकार किसानों को राहत देने के उद्देश्य से 36 हजार 585 करोड़ रुपये की ऋणमाफी प्रदान करेगी, जिससे राज्य के लगभग 56 लाख किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने इसे महाराष्ट्र के इतिहास की सबसे बड़ी ऋणमाफी बताते हुए कहा कि यह कोई राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि संकटग्रस्त किसानों को आर्थिक राहत देने का महत्वपूर्ण कदम है। सह्याद्री अतिथिगृह में राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर आयोजित पत्रकार परिषद में मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी मानसून सत्र में महिला किसानों को कानूनी रूप से किसान का दर्जा देने वाला महत्वपूर्ण विधेयक भी प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटील, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे, जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन, सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील सहित कई मंत्री उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋणमाफी स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत देकर उन्हें पुनः कृषि गतिविधियों के लिए सक्षम बनाने और नए ऋण प्राप्त करने का अवसर देने का यह एक आवश्यक माध्यम है। उन्होंने बताया कि सरकार ने ऋणमाफी के संबंध में एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर योजना के मानदंड तय किए गए हैं। किसानों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और कुछ मंत्रियों की एक उपसमिति भी गठित की गई है। मुख्यमंत्री ने राज्य में वर्षा की चिंताजनक स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया कि जून माह में अब तक सामान्य से लगभग 80 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। विदर्भ में 80 प्रतिशत, मध्य महाराष्ट्र में 83 प्रतिशत, कोंकण में 86 प्रतिशत और मराठवाड़ा में 69 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। कई जिलों में अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। उन्होंने किसानों से जल्दबाजी में बुवाई न करने की अपील करते हुए कहा कि कम से कम 100 मिमी वर्षा का पानी भूमि में समा जाने के बाद ही बुवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के बांधों में वर्तमान में केवल 24 प्रतिशत जल भंडारण है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 33 प्रतिशत था। संभावित पेयजल संकट को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में कृषि उपयोग के लिए पानी पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में बीजों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है तथा किसानों को कम पानी वाली मोटे अनाज (श्री अन्न) की खेती की ओर बढ़ना चाहिए। उर्वरकों की उपलब्धता सामान्य है और यूरिया की कमी दूर करने के प्रयास जारी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मानसून सत्र में लगभग 10 महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें महिला किसानों को कानूनी किसान का दर्जा देने वाला विधेयक विशेष महत्व रखता है। इससे महिला किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी और उन्हें आधिकारिक पहचान प्राप्त होगी।
अन्नदाता का पहला अधिकार राज्य की तिजोरी पर : एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य की तिजोरी पर पहला अधिकार अन्नदाता का है। सरकार पहले भी 36 हजार करोड़ रुपये की ऋणमाफी, वर्ष 2022 में 15 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन अनुदान दे चुकी है। इसके अलावा एनडीआरएफ मानकों से दोगुनी सहायता, फसल क्षति मुआवजे की सीमा दो हेक्टेयर से बढ़ाकर तीन हेक्टेयर करना तथा प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई जैसे निर्णय भी लिए गए हैं। उन्होंने किसानों से मौसम की स्थिति को देखते हुए जल्दबाजी में बुवाई न करने की अपील की।
महिला किसानों को अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : सुनेत्रा अजित पवार
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के अवसर पर राज्य सरकार महिला किसानों को अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से महिला किसानों को कानूनी दर्जा देने वाला विधेयक मानसून सत्र में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधानमंडल जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं को व्यक्त करने का सर्वोच्च मंच है और सरकार किसान, महिला, युवा, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आधारभूत संरचना से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा और समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
मानसून सत्र में पेश होंगे कई महत्वपूर्ण विधेयक
महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग संशोधन विधेयक, महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, महाराष्ट्र औद्योगिक विकास संशोधन विधेयक, महाराष्ट्र रोजगार गारंटी संशोधन विधेयक, महाराष्ट्र महानगरपालिका कानून संशोधन विधेयक, निजी कौशल विश्वविद्यालय स्थापना एवं विनियमन संशोधन विधेयक, महाराष्ट्र वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संशोधन विधेयक तथा द्वितीय अनुपूरक विनियोग विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे। सरकार को उम्मीद है कि इन विधेयकों के माध्यम से प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधारों को गति मिलेगी।

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