Wednesday, May 20, 2026
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एआई, ई-गवर्नेंस और डिजिटल इनोवेशन से महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति

मुंबई। महाराष्ट्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ई-गवर्नेंस और डिजिटल इनोवेशन के माध्यम से अर्थव्यवस्था को नई गति देने तथा प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने का संकल्प व्यक्त किया है। बुधवार को ‘पॉवरिंग महाराष्ट्राज इकॉनॉमी थ्रू एआय, ई-गव्हर्नन्स अँड डिजिटल इनोव्हेशन’ विषय पर आयोजित परिसंवाद में डिजिटल परिवर्तन से जुड़ी संभावनाओं और चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। यह चर्चा ‘टेक महाइम्पैक्ट 2026’ परिषद के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसमें तकनीक, नवाचार, डिजिटल गवर्नेंस और सीएसआर क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञ शामिल हुए। परिसंवाद में डॉ. ज्ञानेश्वर मुले, भुवनेश्वरी एस., अजय प्रसाद श्रीवास्तव, अभिषेक लाहिरी, के. वेंकटेशम, अवर्तन बोकील और भगवान पाटील ने अपने विचार रखे। राज्य सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग की आयुक्त भुवनेश्वरी एस. ने कहा कि सरकार केवल दस्तावेजों के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और ‘गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग’ पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों के डेटाबेस को एपीआई इंटीग्रेशन के जरिए आपस में जोड़ा जा रहा है, जिससे नागरिकों को सेवाएं प्राप्त करना अधिक सरल होगा। साथ ही, एआई एनालिटिक्स की मदद से समस्याओं का पहले से अनुमान लगाकर डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा। डॉ.ज्ञानेश्वर मुले फाउंडेशन के संस्थापक और पूर्व आईएफएस अधिकारी डॉ. ज्ञानेश्वर मुले ने कहा कि किसी भी तकनीक का उपयोग करने से पहले समस्या की सही पहचान और विश्लेषण जरूरी है। उन्होंने दिल्ली की पासपोर्ट सेवा के डिजिटलीकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीक का उद्देश्य आम नागरिक का जीवन आसान बनाना होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सीएसआर 2.0 के माध्यम से तकनीक का उपयोग केवल व्यवस्था सुधार तक सीमित न रहकर सामाजिक परिवर्तन और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के लिए होना चाहिए। बृहस्पति टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के निदेशक और पूर्व पुलिस अधिकारी के. वेंकटेशम ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। उन्होंने बताया कि छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार एआई आधारित शैक्षणिक वीडियो और ग्राफिक्स तैयार किए जा सकते हैं। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ़ इंडिया पुणे के निदेशक अजय प्रसाद श्रीवास्तव ने कृषि क्षेत्र में एआई के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गन्ना उद्योग के लिए विकसित एक एआई आधारित ऐप किसानों को गन्ना कटाई का सही समय तय करने में मदद करता है। इससे किसानों का नुकसान कम होता है और चीनी मिलों में भीड़ प्रबंधन आसान होता है। आयरन माउंटेन इंडिया के चीफ ऑफ ग्रोथ बिजनेस अभिषेक लाहिरी ने कहा कि सरकारी योजनाओं में एआई के उपयोग के दौरान पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने ‘एक्सप्लेनेबल एआई’ की अवधारणा को प्रशासन में विश्वास निर्माण के लिए आवश्यक बताया। इसी कंपनी के अवर्तन बोकील ने कहा कि भविष्य में तकनीक की गति और तेज होगी तथा डिजिटल परिवर्तन की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों से करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सीएसआर और तकनीक का प्रभावी समन्वय सामाजिक परिवर्तन का मजबूत माध्यम बन सकता है। परिसंवाद में यह स्पष्ट किया गया कि महाराष्ट्र सरकार और ‘महाआयटी’ प्रशासनिक कार्यों में एआई का प्रभावी उपयोग कर पारदर्शिता बढ़ाने, सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने और नागरिकों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहे हैं।

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