
ठाणे। महाराष्ट्र सरकार के उस निर्देश के तहत कि सार्वजनिक सेवा से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को मराठी भाषा की व्यावहारिक जानकारी होना आवश्यक है, ठाणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने रिक्शा चालकों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान कुल 2317 रिक्शा चालकों की जांच की गई, जिनमें से केवल 142 चालक ऐसे पाए गए जिन्हें मराठी भाषा की व्यावहारिक जानकारी नहीं थी। यह विशेष अभियान महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के निर्देशों के अनुसार चलाया गया। सरकार ने रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए स्थानीय भौगोलिक जानकारी के साथ मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया है। इसी के तहत ठाणे शहर के विभिन्न इलाकों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, बैच और अन्य दस्तावेजों की जांच के साथ यह भी परखा गया कि वे मराठी में बातचीत कर सकते हैं या नहीं, यात्रियों द्वारा बताए गए पते समझते हैं या नहीं तथा रोजमर्रा के व्यवहार में मराठी भाषा का उपयोग कर पाते हैं या नहीं। मुख्य आरटीओ अधिकारी हेमांगिनी पाटिल के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई में पाया गया कि अधिकांश रिक्शा चालक मराठी भाषा में सहजता से संवाद कर रहे थे। परिवहन विभाग ने इसे शहर में मराठी भाषा के प्रति बढ़ती जागरूकता का सकारात्मक संकेत बताया है। विभाग का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में स्थानीय भाषा के उपयोग से यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और भरोसेमंद सेवा मिल सकेगी। जांच में जिन 142 चालकों को मराठी भाषा की व्यावहारिक जानकारी नहीं थी, उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण लेने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के आदेशानुसार ऐसे चालकों को मराठी भाषा का प्रशिक्षण पूरा करना होगा। वहीं, नकली दस्तावेज, नियमों के उल्लंघन या अधूरी जानकारी पाए जाने पर संबंधित चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। यह जानकारी उप आरटीओ अधिकारी रोहित काटकर ने दी।




