Wednesday, May 20, 2026
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महाराष्ट्र को न्यूक्लियर ऊर्जा हब बनाने की तैयारी, अमेरिकी कंपनियों को निवेश का न्योता

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बोले– भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए परमाणु ऊर्जा होगी सबसे महत्वपूर्ण

मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के तेजी से विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में स्थिर और निरंतर बिजली की मांग कई गुना बढ़ने वाली है। केवल सौर और पवन ऊर्जा के भरोसे भविष्य का औद्योगिक विकास संभव नहीं होगा, इसलिए न्यूक्लियर पावर यानी परमाणु ऊर्जा भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने जा रही है। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों से महाराष्ट्र में निवेश करने का आह्वान भी किया। बुधवार को मुख्यमंत्री फडणवीस मुंबई में आयोजित “यूएस न्यूक्लियर एग्जीक्यूटिव मिशन इन इंडिया” के अंतर्गत न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट और यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में ऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव आभा शुक्ला, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्रा, उद्योग विभाग के प्रधान सचिव पी. अनबलगन, महाजेनको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राधाकृष्णन बी., मुख्यमंत्री के निवेश सलाहकार कौस्तुभ धवसे, राजशिष्टाचार विभाग के सचिव राजेश गवांदे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा अमेरिका की कई प्रमुख न्यूक्लियर कंपनियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया। इनमें न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट की अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मारिया कोर्स्निक, सेंट्रस एनर्जी के उपाध्यक्ष डैन लिस्टिको, क्लीन कोर थोरियम एनर्जी के सीईओ मेहुल शाह, कर्टिस-राइट कॉर्पोरेशन के उपाध्यक्ष गैरी वोल्स्की, यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम की प्रबंध निदेशक निवेदिता मेहरा, एडलो इंटरनेशनल के अध्यक्ष जैक एडलो और होल्टेक एशिया के सीईओ अनंत जैन शामिल थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि दुनिया भर में ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव हो रहा है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि केवल नवीकरणीय ऊर्जा से औद्योगिक जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं। लगातार बिजली उपलब्ध कराने के लिए न्यूक्लियर ऊर्जा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य है और भारत में आने वाले कुल विदेशी निवेश का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा महाराष्ट्र में आता है। मुंबई और नवी मुंबई में देश की लगभग 60 प्रतिशत डेटा सेंटर क्षमता केंद्रित है, जिससे बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु सहयोग के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में सकारात्मक बदलाव हुए हैं और निजी क्षेत्र की भागीदारी से नए अवसर पैदा हुए हैं। महाराष्ट्र केवल आयातित रिएक्टरों का उपभोक्ता नहीं बनना चाहता, बल्कि राज्य को न्यूक्लियर उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि महाराष्ट्र सरकार न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को औद्योगिक भूमि, बुनियादी ढांचा, स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च सहयोग और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने में पूरा सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण के उद्योगों को अनुदान और विशेष रियायतें देने की भी तैयारी है। उन्होंने स्मॉल मॉड्युलर रिएक्टर (SMR) तकनीक को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र इस क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनने के लिए तैयार है। यह तकनीक स्टील, सीमेंट, उर्वरक उद्योग और डेटा सेंटर जैसी ऊर्जा-गहन परियोजनाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
बैठक के दौरान न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट की प्रमुख मारिया कोर्सनिक ने कहा कि भारत में न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। महाराष्ट्र में कुशल मानव संसाधन, औद्योगिक तकनीक और मजबूत सप्लाई चेन उपलब्ध होने के कारण यहां निवेश के लिए अनुकूल वातावरण है। ऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव आभा शुक्ला ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि महाराष्ट्र की वर्तमान बिजली मांग 31 गीगावॉट है, जो 2030 तक बढ़कर 42 गीगावॉट होने का अनुमान है। राज्य ने 2035 तक अपनी 65 प्रतिशत ऊर्जा जरूरत नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए न्यूक्लियर ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महाजेनको के प्रबंध निदेशक राधाकृष्णन बी. ने बताया कि अगले दो दशकों में 7 हजार मेगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। राज्य में औद्योगिक क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार स्मॉल मॉड्युलर रिएक्टर तकनीक के उपयोग पर भी काम किया जा रहा है। बैठक में उपस्थित विभिन्न अमेरिकी कंपनियों और विशेषज्ञों ने महाराष्ट्र में न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, तकनीकी सहयोग और संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की।

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