
भूपेन्द्र सिंह/उन्नाव, उत्तर प्रदेश। युवा कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक शिवहरे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधा। एक निजी होटल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने स्मार्ट मीटर, एलपीजी की किल्लत और यूएस ट्रेड डील जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए। इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुशवाहा सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। संगठनात्मक मुद्दों पर जानकारी देते हुए दीपक शिवहरे ने बताया कि हाल ही में ‘विद आईवाईसी’ अभियान के तहत कार्यकर्ताओं के काम का 90 दिनों तक मूल्यांकन किया गया। इसी मूल्यांकन के आधार पर सैफ को उन्नाव का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन में मेहनत और सक्रियता के आधार पर ही जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। बता दे कि प्रेसवार्ता में शिवहरे ने यूएस ट्रेड डील को किसान विरोधी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह डील विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है, जिससे देश के किसानों और छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का भी आरोप लगाया। स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों को लेकर भी उन्होंने कड़ा विरोध जताया। शिवहरे ने कहा कि गरीब और मजदूर वर्ग पहले ही आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, और ऐसे में प्रीपेड मीटर व्यवस्था उन पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। उन्होंने बताया कि बैलेंस खत्म होते ही बिजली कट जाती है, जिससे आम लोगों के दैनिक जीवन और बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने इस व्यवस्था को तत्काल रद्द करने या पोस्टपेड प्रणाली के तहत लागू करने की मांग की। एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और कालाबाजारी पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उनका आरोप था कि गैस एजेंसियों पर नियंत्रण न होने के कारण कालाबाजारी बढ़ रही है और गरीबों को महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर गैस सिलेंडर 1000 से 2000 रुपये तक अधिक दाम पर मिल रहे हैं, जिससे लोग फिर से चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राजनीतिक विरोध के नाम पर झंडा जलाने जैसी घटनाओं को गलत बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी के झंडे का सम्मान होना चाहिए, क्योंकि उससे लाखों लोगों की आस्था जुड़ी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतियों का विरोध होना चाहिए, न कि प्रतीकों का अपमान। महिला आरक्षण बिल को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस 33 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसमें ओबीसी और एससी वर्ग की महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान स्वरूप में यह बिल सभी वर्गों को समान न्याय नहीं देता।




