
गोंडा, उत्तर प्रदेश। श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त प्रह्लाद प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा व्यास डॉ. कौशलेन्द्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कि धर्म और आध्यात्म का ज्ञान यदि बचपन में दिया जाए, तो उसका प्रभाव व्यक्ति के पूरे जीवन पर पड़ता है।
उन्होंने बताया कि भक्त प्रह्लाद ने अपनी माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था, जिसके प्रभाव से उनके जीवन के अनेक कष्ट दूर हो गए। इसके बाद उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की पावन लीलाओं का भी वर्णन किया। महाराज ने कहा कि बच्चों को बचपन में जो संस्कार और धार्मिक शिक्षा दी जाती है, वही उनके जीवन की दिशा तय करती है। माता-पिता की सेवा, प्रेम और समाज में सद्भाव के साथ रहना ही धर्म का मूल है। उन्होंने आगे कहा कि उत्तम संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को मात्र पांच वर्ष की आयु में भगवान के दर्शन प्राप्त हुए और उन्हें 36 हजार वर्षों तक राज्य करने का वरदान मिला। इस अवसर पर मुख्य जजमान हरिराम दुबे, अंजनी दुबे, राम आशीष दुबे, राम सूरत दुबे, पंकज दुबे, संतोष राजू तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया।



