Wednesday, March 25, 2026
Google search engine
HomeMaharashtra60 साल बाद जमीन के बदले जमीन की मांग खारिज, बॉम्बे हाई...

60 साल बाद जमीन के बदले जमीन की मांग खारिज, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा—“गलत आधार और अत्यधिक देरी”

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोयना परियोजना के लिए 1959 में अधिग्रहित जमीन के बदले दूसरी जमीन देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि छह दशक से अधिक समय बाद किए गए ऐसे “अत्यधिक विलंबित” और “गलत आधार” वाले दावों पर रिट अधिकार क्षेत्र में विचार नहीं किया जा सकता। यह याचिका लक्ष्मण आत्माराम निमन (पवार) के कानूनी वारिस द्वारा दायर की गई थी, जिसमें रायगढ़ और सतारा के अधिकारियों को वैकल्पिक जमीन देने के प्रस्ताव पर कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अजेय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की खंडपीठ ने की। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि याचिका में की गई मांगें “अस्पष्ट और असामान्य” हैं तथा इसके समर्थन में कोई ठोस कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने 8 अगस्त 2022 के अपने आवेदन पर कार्रवाई कर पात्रता के आधार पर वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश मांगा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 15 अप्रैल 1959 को कोयना परियोजना के लिए अधिग्रहण का अवार्ड घोषित हो चुका था। एक बार अवार्ड पारित हो जाने और प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद यह माना जाता है कि संबंधित जमीन मालिकों को मुआवजा मिल चुका है और अधिग्रहण की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। खंडपीठ ने विशेष रूप से “असाधारण देरी” पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 60 साल से अधिक समय बाद ऐसे दावे स्वीकार नहीं किए जा सकते। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता महाराष्ट्र प्रोजेक्ट विस्थापित व्यक्ति पुनर्वास अधिनियम, 1976 का सहारा नहीं ले सकता, क्योंकि यह कानून अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू हुआ था और इसे पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने फैसले में यह भी चेतावनी दी कि इस प्रकार की याचिकाएं “अटकलों पर आधारित” प्रतीत होती हैं और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि मुकदमेबाजी “लॉटरी का टिकट” नहीं है, जिसमें बिना अधिकार के लाभ की उम्मीद की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट आधार न मिलने पर याचिका को खारिज कर दिया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments