
मुंबई। महाराष्ट्र में नदियों के बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मंगलवार को पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने विधानसभा में जानकारी दी कि ‘नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण’ (River Rejuvenation Authority) के गठन का प्रस्ताव अंतिम चरण में है। सदस्य सुधीर मुनगंटीवार द्वारा उठाए गए मुद्दे के जवाब में मंत्री मुंडे ने कहा कि यह प्राधिकरण केवल नदी प्रदूषण नियंत्रण और पुनर्जीवन पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने बताया कि चंद्रपुर की इरई और झरपट नदियों को प्राथमिकता देते हुए पहले चरण में शामिल किया जाएगा। मंत्री मुंडे ने कहा कि राज्य में नदी प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुका है, खासकर विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में। औद्योगिक अपशिष्ट, शहरी क्षेत्रों का बिना उपचार किया गया सीवेज और खेती में रासायनिक उपयोग इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य का करीब 96 प्रतिशत सांडपानी बिना शुद्धिकरण के सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। मुंबई, पुणे, नाशिक, नागपुर, सोलापुर और पालघर जैसे क्षेत्रों की नदियां भी भारी प्रदूषण की चपेट में हैं। मंत्री ने माना कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण इस समस्या पर प्रभावी काम नहीं हो पा रहा है, जिसे दूर करने के लिए अलग प्राधिकरण जरूरी है। सरकार की योजना के अनुसार, औद्योगिक और सीवेज प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तय समयसीमा के भीतर ठोस कार्ययोजना लागू की जाएगी। उन्होंने बताया कि नागपुर की नाग नदी के पुनर्जीवन के लिए 1926.99 करोड़ रुपये की परियोजना पहले ही मंजूर की जा चुकी है और इस पर काम शुरू हो चुका है। इस परियोजना के तहत 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) चालू हैं, जबकि 3 और प्रस्तावित हैं। मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि नदियों को स्वच्छ रखना समय की मांग है और इसके लिए सरकार ठोस व सकारात्मक कदम उठा रही है। उन्होंने इस दिशा में सभी नागरिकों और संबंधित संस्थाओं से सहयोग की अपील भी की।




