
लखनऊ, उत्तर प्रदेश। रविवार को संसद में पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह बजट किसानों, युवाओं, महिलाओं, उद्योगपतियों और गरीबों की आवाज बनेगा। उन्होंने इसे ‘समावेशी बजट’ बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से विकास की सोच समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगी। ब्रजेश पाठक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार की नीतियों और योजनाओं के चलते करीब 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे हैं। पाठक के अनुसार, यह सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसके तहत विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य भारत को “विकसित भारत” बनाना है और इसी उद्देश्य के अनुरूप आर्थिक नीतियां तैयार की जा रही हैं। अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षणों और नीतिगत आकलन में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाता है कि विनिर्माण क्षेत्र के साथ जीडीपी का अनुपात कैसे बढ़ाया जाए, कृषि क्षेत्र के साथ जीडीपी का संतुलन कैसे मजबूत किया जाए और देश के समग्र आर्थिक संकेतकों को किस प्रकार बेहतर बनाया जाए। उनके अनुसार, ये सभी पहल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत दिशा देने के लिए की जा रही हैं। इसी दौरान मेघवाल ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के व्यवहार पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के भाषण के समय विपक्ष द्वारा किया गया हंगामा संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता दोनों सदन में मौजूद थे और सत्ता पक्ष व विपक्ष के अधिकांश सांसद भी उपस्थित थे, इसके बावजूद राष्ट्रपति के बोलते ही शोर-शराबा शुरू कर दिया गया। अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है और यह एक गलत मिसाल पेश करता है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे संसद की गरिमा और संवैधानिक परंपराओं का सम्मान करें।



