HomeMaharashtraसरकारी कार्यालयों में जन्मदिन मनाने की प्रथा कब होगी बंद?

सरकारी कार्यालयों में जन्मदिन मनाने की प्रथा कब होगी बंद?

धूमधाम से मनाया गया बीएमसी आर/मध्य में कमीशनखोर सहायक अभियंता हितेन्द्र कोसंबिया का जन्मदिन

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के आर/मध्य विभाग में कमीशनखोरी को लेकर चर्चित सहायक अभियंता हितेन्द्र कोसंबिया का जन्मदिन सरकारी कार्यालय में धूमधाम से मनाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्यालय समय में व्यक्तिगत समारोह आयोजित किया गया। जन्मदिन के अवसर पर परिरक्षण विभाग कार्यालय को गुब्बारों से सजाया गया और कर्मचारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी कार्यालयों का उपयोग केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए होना चाहिए। ऐसे में कार्यालय समय के दौरान जन्मदिन जैसे निजी कार्यक्रम आयोजित करना सरकारी नियमों और अनुशासन के विपरीत है। इस मामले में बीएमसी आर/मध्य विभाग के सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बारे में सहायक आयुक्त तांबे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। विवाद का एक अन्य पहलू समारोह पर हुए खर्च को लेकर भी सामने आया है। आलोचकों का सवाल है कि कार्यक्रम पर हुआ खर्च किसने वहन किया। क्या यह खर्च किसी ठेकेदार द्वारा किया गया? क्योंकि बीएमसी आर/मध्य के परिरक्षण विभाग में बीएमसी के विकास कार्यों से संबंधित निधि में सहायक अभियंता हितेन्द्र कोसंबिया, सहायक अभियंता मच्छिंद्र नारायण मोहिते से लेकर कनिष्ठ अभियंताओं तक पर कमीशन लेने के आरोप लगते रहे हैं। वहीं, कुछ लोगों का आरोप है कि विजिलेंस विभाग जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। सहायक अभियंता मच्छिंद्र नारायण मोहिते भी सरकारी काम छोड़कर जन्मदिन समारोह में व्यस्त दिखाई दिए। वहीं, सूत्रों का दावा है कि परिरक्षण विभाग में होने वाले कार्यों की प्रत्येक फाइल पर कनिष्ठ अभियंता से लेकर सहायक आयुक्त और उपायुक्त स्तर तक लगभग 30 प्रतिशत का कमीशन तय है। यह कहना गलत नहीं होगा कि सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे के नेतृत्व में आर/मध्य विभाग में अनियमितताओं व लूट तंत्र का संचालन हो रहा है। यह पूरा मामला जांच का विषय है। नागरिकों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में निजी आयोजनों पर प्रतिबंध है, तो ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मामले को लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से स्पष्टता और आवश्यक कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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