
मुंबई। दिल्ली में मंगलवार को सीजेपी के नेतृत्व में आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई झड़प पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा और जानबूझकर अशांति फैलाने को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा और जानबूझकर अशांति फैलाने को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए प्रदर्शनों का फायदा उठाते हैं। कोई भी सरकार नागरिकों पर लाठीचार्ज नहीं करना चाहती।” उनकी यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के कई वीडियो वायरल हुए। इन वीडियो में एक ओर पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किए जाने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं, वहीं कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों के एक समूह द्वारा कथित पत्थरबाजी और हिंसा के दृश्य भी सामने आए हैं। इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है और ऐसे मामलों का समाधान बल प्रयोग के बजाय संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए। वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया। उन्होंने परीक्षा संबंधी विवादों पर न्याय की मांग कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ बल प्रयोग पर सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झड़प के दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, जिनमें से कुछ को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के व्यवहार को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है।

