Wednesday, May 13, 2026
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भदोही के बाहुबली विजय मिश्रा: सत्ता, दबदबा और पतन की कहानी

भदोही/इंद्र यादव। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब भी बाहुबली नेताओं की चर्चा होती है, तो विजय मिश्रा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। एक समय ऐसा था जब ज्ञानपुर की राजनीति में उनका दबदबा इतना मजबूत था कि उनकी मर्जी के बिना कोई बड़ा फैसला नहीं माना जाता था। लेकिन समय का पहिया ऐसा घूमा कि कभी सत्ता और रसूख का प्रतीक रहे विजय मिश्रा आज अदालतों और जेल की सलाखों के बीच सिमटते नजर आ रहे हैं।
ज्ञानपुर में चलता था विजय मिश्रा का सिक्का
विजय मिश्रा सिर्फ विधायक भर नहीं थे, बल्कि भदोही और आसपास के क्षेत्रों में एक मजबूत राजनीतिक शक्ति माने जाते थे। ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर उनका ऐसा प्रभाव था कि जेल में रहते हुए भी वह चुनाव जीतने में सफल रहे। उनकी सबसे बड़ी ताकत आम जनता से सीधा जुड़ाव माना जाता था। गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनना और मदद करना उनकी राजनीतिक शैली का हिस्सा था। इसी वजह से एक बड़ा जनाधार उनके साथ बना रहा। राजनीतिक गलियारों में उनकी पहचान समाजवादी राजनीति से भी जुड़ी रही। कहा जाता है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। वर्ष 2007 में पुलिस कार्रवाई के दौरान मुलायम सिंह द्वारा उन्हें हेलीकॉप्टर में साथ ले जाने की घटना भी काफी चर्चित रही थी।
अपनों से टकराव बना कमजोरी
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विजय मिश्रा के पतन की एक बड़ी वजह उनका लगातार बढ़ता विरोध भी रहा। उन पर अपने ही समाज के प्रभावशाली नेताओं को कमजोर करने के आरोप लगते रहे। पूर्व सांसद पंडित गोरखनाथ पांडेय के परिवार से विवाद, पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्रा से राजनीतिक संघर्ष और गोपीगंज तिहरे हत्याकांड जैसे मामलों ने उनके खिलाफ विरोधियों का दायरा बढ़ाया। धीरे-धीरे उनके विरोध में राजनीतिक और सामाजिक मोर्चे मजबूत होते गए।
योगी सरकार में बदला माहौल
वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद विजय मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उनकी कथित अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई और करोड़ों रुपये की संपत्ति कुर्क की गई। इसके साथ ही उनके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोली गईं और कई मामलों में तेजी से सुनवाई शुरू हुई।
अदालत का फैसला और राजनीतिक भविष्य
हाल ही में प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने विजय मिश्रा को 46 साल पुराने एक हत्याकांड में दोषी करार दिया। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि अब उनका सक्रिय राजनीति में पहले जैसा प्रभाव लौट पाना बेहद मुश्किल है। जिस ज्ञानपुर सीट पर कभी उनका दबदबा था, वहां अब भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन के विधायक विपुल दुबे का प्रभाव है। कभी उनके करीबी रहे कई नेता और समर्थक भी अब अलग राह पकड़ चुके हैं।
राजनीति में स्थायी नहीं होता दबदबा
विजय मिश्रा की कहानी उत्तर प्रदेश की राजनीति का ऐसा अध्याय बन गई है, जो बताता है कि सत्ता और प्रभाव हमेशा स्थायी नहीं रहते। समय, कानून और राजनीतिक परिस्थितियां जब बदलती हैं, तो बड़े से बड़ा राजनीतिक किला भी ढह सकता है। भदोही की राजनीति में कभी मजबूत पहचान रखने वाले इस नेता की कहानी अब अदालत, मुकदमों और जेल तक सीमित होती दिखाई दे रही है।

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