
इंद्र यादव/ठाणे। अपराध की दुनिया में कुछ लोग खुद को जुर्म का बेताज बादशाह समझने लगते हैं। इन्हीं में से एक 27 वर्षीय ओंकार भोसले है, जो ठाणे के रेमंड एरिया, कैडबरी जंक्शन के पास का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज इस आरोपी के खिलाफ हाल ही में गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ था। मामले की शुरुआत 22 अगस्त 2026 को हुई। चितलसर पुलिस स्टेशन में शिकायतकर्ता नितेश नरेश शिंदे, निवासी ब्रह्मांड, ठाणे की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 189(1), 189(2), 190, 191(2), 351(2), 352 के साथ शस्त्र अधिनियम और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। यानी मामला कोई हल्का-फुल्का नहीं था। इसी बीच ठाणे पुलिस आयुक्तालय के खंडणी विरोधी पथक (एंटी एक्सटॉर्शन सेल) ने भी आरोपी की तलाश शुरू कर दी। ओंकार भोसले को जैसे ही भनक लगी कि पुलिस उसकी तरफ बढ़ रही है, उसने फिल्मी अंदाज में ठाणे छोड़ने में ही भलाई समझी और महाराष्ट्र से निकलकर सीधे राजस्थान के सीकर जिले के रिंगस जा पहुंचा। शायद उसने सोचा होगा कि इतनी दूर कौन आएगा और ठाणे पुलिस का हाथ आखिर कितना लंबा होगा? लेकिन जनाब का अंदाजा गलत निकला। ठाणे क्राइम ब्रांच की टीम ने तकनीकी जांच और खुफिया जानकारी के आधार पर आखिरकार उसका ठिकाना खोज निकाला। जानकारी पुख्ता होते ही टीम राजस्थान रवाना हुई और स्थानीय पुलिस की मदद से 27 अगस्त 2026 को रात करीब एक बजे रिंगस में छिपे ओंकार भोसले को दबोच लिया। जिस आरोपी ने ठाणे से सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर पुलिस को चकमा देने की योजना बनाई थी, उसकी ‘राजस्थान यात्रा’ वहीं समाप्त हो गई। अपराधी अक्सर भागते समय यह भूल जाते हैं कि पुलिस भी अब पुरानी फिल्मों वाली नहीं रही—तकनीक और खुफिया तंत्र के दौर में शहर और राज्य बदलने भर से पहचान और ठिकाना छिपाना आसान नहीं है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ओंकार भोसले को ठाणे लाया गया और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए चितलसर पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया गया। पूरी कार्रवाई ठाणे शहर के पुलिस सह आयुक्त (अपराध) पंजाबराव उगले, अपर पुलिस आयुक्त अमरसिंह जाधव और सहायक पुलिस आयुक्त (शोध-2) विनय घोरपड़े के मार्गदर्शन में खंडणी विरोधी पथक की टीम ने की। कार्रवाई में शैलेंद्र साळवी, सहायक पुलिस निरीक्षक भूषण कापड़णीस, पुलिस हवलदार शैलेश शिंदे, सुमित मधाळे, पुलिस सिपाही अरविंद शेजवळ और तानाजी पाटील शामिल रहे। कुल मिलाकर, ठाणे से राजस्थान पहुंचकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे ओंकार भोसले की योजना पर ठाणे पुलिस ने पानी फेर दिया। जिसे लगा था कि राज्य की सीमा पार करते ही पुलिस की पहुंच खत्म हो जाएगी, उसे रिंगस में रात एक बजे इसका जवाब मिल गया। ठाणे पुलिस का संदेश भी साफ है—भागना आसान हो सकता है, लेकिन छिपना मुश्किल!

