
झांसी, उत्तर प्रदेश। उत्तर मध्य रेलवे के कोच मिडलाइफ रिहैबिलिटेशन (CMLR) वर्कशॉप, झांसी ने यात्रियों को बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक अभिनव पहल की है। वर्कशॉप ने अपने तकनीकी स्टाफ की मदद से ललितपुर जिले के माताटीला, जीरोन और जखोरा तथा दतिया जिले के बसई रेलवे स्टेशन पर मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट स्थापित किए हैं। ये सभी स्टेशन एनएसजी-6 श्रेणी के हैं। इस पहल की खास बात यह है कि टॉयलेट निर्माण में कोचों की पीरियडिक ओवरहॉलिंग (POH) के दौरान निकले उपयोग योग्य पार्ट्स का दोबारा इस्तेमाल किया गया। इनमें एफआरपी टॉयलेट मॉड्यूल, बायो-टैंक, पानी की टंकियां और अन्य पुन: उपयोग योग्य सामग्री शामिल है। सभी पार्ट्स की जांच, मरम्मत और नवीनीकरण के बाद उन्हें नए स्वरूप में उपयोग किया गया। रेलवे के अनुसार, यह परियोजना ‘रीयूज़–रिफर्बिश–रीबिल्ड’ मॉडल पर आधारित है, जिससे कबाड़ समझी जाने वाली सामग्री का बेहतर उपयोग कर कम लागत में यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। टॉयलेट के निर्माण, स्थापना, प्लंबिंग, ड्रेनेज और अन्य तकनीकी कार्य पूरी तरह सीएमएलआर वर्कशॉप के कर्मचारियों ने ही किए। रेलवे का कहना है कि इन छोटे स्टेशनों पर स्वच्छ शौचालय की सुविधा मिलने से महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को विशेष राहत मिलेगी। साथ ही यह पहल पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और लागत में कमी की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उत्तर मध्य रेलवे ने इसे यात्रियों की सुविधा बढ़ाने, स्वच्छता को प्रोत्साहन देने और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग का सफल उदाहरण बताया है।

