
मुंबई। राज्य में क्षेत्रीय असमानता को कम कर सभी जिलों का संतुलित और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी विभागों को निर्धारित समयसीमा में ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ विजन मैनेजमेंट नियामक मंडल की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अगले चरण में प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान केंद्रित करने को कहा। बैठक में मंगलप्रभात लोढ़ा, अतुल सावे, नितेश राणे, आशीष जायसवाल, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से), ‘मित्रा’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी और बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से अधिक है, लेकिन 11 जिलों में यह औसत से कम है। इन जिलों को ‘विकास का इंजन’ बनाकर मुख्यधारा में लाना आवश्यक है, जिससे राज्य के समग्र विकास को गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के आकांक्षी जिलों की तर्ज पर राज्य में 10 आकांक्षी जिले और 174 आकांक्षी तालुके चिन्हित किए गए हैं, जिससे सूक्ष्म स्तर पर विकास को बढ़ावा मिलेगा। सतत विकास लक्ष्यों में महाराष्ट्र की स्थिति को फिर से अग्रणी बनाने के लिए विभागवार ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। नियोजन विभाग को प्रारंभिक दिशा-निर्देश तुरंत जारी करने और वित्त विभाग को 30 अप्रैल तक सभी परियोजनाओं का आर्थिक मूल्यांकन पूरा करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों—केंद्र व राज्य योजनाएं, जिला वार्षिक योजना, वित्त आयोग अनुदान तथा आंतरिक व बाह्य ऋण—का प्रभावी नियोजन करने पर जोर दिया। साथ ही, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और भूमि मूल्य नीति के माध्यम से वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों का उपयोग करने की आवश्यकता बताई। निजी निवेश, निर्यात और उपभोग को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत निर्णय लेने तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार करने पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय और नियमित प्रगति समीक्षा के लिए प्रभावी मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में मंत्री अतुल सावे ने निधि के समयबद्ध उपयोग के लिए स्पष्ट मानदंड तय करने की जरूरत बताई, जबकि नितेश राणे ने भविष्य के विकास क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की योजना बनाने का सुझाव दिया। आशीष जायसवाल ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति की आवश्यकताओं के आधार पर जिला विकास निधि के बेहतर नियोजन की बात रखी। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के सचिवों ने आगामी चार वर्षों की योजनाओं का प्रस्तुतीकरण भी किया, जिसमें ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।




