
मुंबई। अमरावती जिले के मेलघाट टाइगर रिजर्व अंतर्गत सिपना वन्यजीव विभाग के चौराकुंड वन क्षेत्र में वन्यजीवों को जहर देकर मारने की घटना की गहन जांच की जा रही है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक प्रतिबंधात्मक उपाय किए जाएंगे। यह जानकारी वन मंत्री गणेश नाईक ने विधान परिषद में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दी। मंगलवार को विधान परिषद सदस्य मिलिंद नार्वेकर द्वारा उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर हुई चर्चा में बच्चू कडू, भाई जगताप, सुनील शिंदे, संजय खोडके और मनीषा कायंदे ने भी भाग लिया। वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग द्वारा आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जिन वन क्षेत्रों में मानव प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध है, वहां मानवीय गतिविधियों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट के माध्यम से निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही वनरक्षकों के गश्ती दलों को सक्रिय करने और स्थानीय नागरिकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सूचनाएं एकत्र करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मेलघाट टाइगर रिजर्व के चौराकुंड वन क्षेत्र में 22 और 23 मई 2026 को जहर दिए जाने के कारण पैंगोलिन, भेकर और बंदर सहित कई वन्यजीवों की मौत का मामला सामने आया था। कुछ जानवरों के अंग सड़ जाने के कारण जांच में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वन क्षेत्र संचालक ने घटनास्थल का दौरा कर जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ के दौरान उसने वन्यजीवों को जहर देने की बात स्वीकार करने के साथ ही चार अन्य लोगों की संलिप्तता की जानकारी भी दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में वन्यजीवों को जहर दिए जाने की पुष्टि हुई है, जबकि विस्तृत जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा कि बाघों और तेंदुओं के अवैध शिकार के पीछे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के सक्रिय होने की बात भी सामने आती रही है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दे रही है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए राज्यभर में अभयारण्यों और तेंदुआ सफारी परियोजनाओं के विकास के साथ विदर्भ में टाइगर रिजर्व विकसित करने पर विचार किया जाएगा। वन्यजीवों के लिए जंगलों में प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता बढ़ाने के विशेष उपाय भी किए जाएंगे, ताकि उन्हें भोजन की तलाश में गांवों और खेतों की ओर आने से रोका जा सके।
वन मंत्री ने कहा कि वन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक जनोन्मुखी बनाने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए राज्य सरकार व्यापक स्तर पर प्रभावी कदम उठाएगी।



