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अवैध लिंग जांच पर महाराष्ट्र सरकार सख्त, पीसीपीएनडीटी कानून की निगरानी के लिए बनेगी राज्यस्तरीय टास्क फोर्स

मुंबई। महाराष्ट्र में पीसीपीएनडीटी (लिंग जांच प्रतिबंध) कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने, बालिका जन्मदर की रक्षा करने और अवैध लिंग जांच पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। मंगलवार को सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधान परिषद में बताया कि इसके लिए राज्यस्तरीय टास्क फोर्स का गठन, विभिन्न समितियों का पुनर्गठन, डिकॉय कार्रवाई में तेजी और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। राज्य में पीसीपीएनडीटी कानून लागू होने के बावजूद भ्रूण लिंग जांच और गर्भपात रैकेट सक्रिय होने के मुद्दे पर विधान परिषद सदस्य डॉ. नीलम गोऱ्हे ने नियम 97 के तहत अल्पकालीन चर्चा प्रस्तुत की थी। इस चर्चा में डॉ. प्रज्ञा सातव, डॉ. मनीषा कायंदे, चित्रा वाघ, राजीव पोतदार, बच्चू कडू, विक्रम काळे, माधवी नाईक, उमाताई खापरे और भावना गवळी सहित अन्य सदस्यों ने हिस्सा लिया। सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं। अवैध लिंग जांच के खिलाफ डिकॉय कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम की राशि 10 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है। इस संबंध में जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल निर्णय लेने से अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं होंगे, बल्कि फैसलों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है। मंत्री आबिटकर ने बताया कि राज्य जांच एवं समन्वय समिति, राज्य सलाहकार समिति और राज्य पर्यवेक्षकीय बोर्ड में नई नियुक्तियां की गई हैं। इसके साथ ही जिलास्तरीय समितियों को भी सक्रिय कर दिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से पूरे अभियान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई है और कानून में मौजूद कमियों को दूर करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुणे में राज्यस्तरीय टास्क फोर्स स्थापित की जाएगी, जो पूरे महाराष्ट्र में पीसीपीएनडीटी कानून के क्रियान्वयन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगी। इस टास्क फोर्स में विधानसभा और विधान परिषद की महिला जनप्रतिनिधियों को शामिल कर एक स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने विश्वास जताया कि यदि जनप्रतिनिधि जिलावार समीक्षा करेंगे तो सरकारी निर्णयों और पीसीपीएनडीटी कानून का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन अधिक प्रभावी होगा। इससे अवैध भ्रूण लिंग जांच और गर्भपात रैकेट पर अंकुश लगाने के साथ बालिकाओं के संरक्षण की व्यवस्था भी अधिक मजबूत होगी।

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