
मुंबई। महाराष्ट्र विधानमंडल की महिला एवं बाल अधिकार व कल्याण समिति ने अध्ययन दौरे के तहत मुंबई की विभिन्न सरकारी और सामाजिक संस्थाओं का दौरा कर छात्राओं और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही आवास, स्वास्थ्य, भोजन, स्वच्छता और सुरक्षा सुविधाओं का प्रत्यक्ष जायजा लिया। समिति ने वरली स्थित संत मीराबाई सरकारी महिला छात्रावास, मुंबई विश्वविद्यालय के महर्षि धोंडो केशव कर्वे महिला छात्रावास और अंधेरी स्थित ए.डी. बावला अनाथालय का निरीक्षण किया। इस दौरान समिति प्रमुख मोनिका राजले, सदस्य सना मलिक, सीमा हिरे, मंजुला गावित, स्नेहा दुबे, ज्योति गायकवाड, महेश सावंत, सुनील शिंदे और किरण सरनाईक मौजूद रहे। बुधवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की कोंकण संभागीय उपायुक्त सुवर्णा पवार, मुंबई शहर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शोभा शेलार, मुंबई उपनगर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शरद कुऱ्हाडे, मुंबई उपनगर के उपजिलाधिकारी प्रशांत ढगे, बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रेमा घाटगे, चिल्ड्रन्स एड सोसायटी के मुख्य अधिकारी प्रवीण भावसार और बाल संरक्षण अधिकारी भी उपस्थित थे। संत मीराबाई सरकारी महिला छात्रावास में समिति ने प्रवेश प्रक्रिया, आवास व्यवस्था, शैक्षणिक एवं अन्य सुविधाओं के साथ शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि छात्राओं की शैक्षणिक प्रगति को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से प्रति माह दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। छात्राओं की पढ़ाई में आर्थिक या अन्य कारणों से बाधा न आए और वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें, इसके लिए छात्रावास में मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। इसके बाद समिति ने मुंबई विश्वविद्यालय के महर्षि धोंडो केशव कर्वे महिला छात्रावास का दौरा कर स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन व्यवस्था और छात्राओं के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण किया। समिति को बताया गया कि विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाली और छात्रावास में रहने की इच्छुक छात्राओं के लिए पर्याप्त क्षमता उपलब्ध है। अंधेरी स्थित ए.डी. बावला अनाथालय में समिति के सदस्यों ने बच्चों से सीधे बातचीत की और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं, भोजन, स्वच्छता, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि एकल अभिभावक वाले बच्चे, बच्चों की देखभाल करने में असमर्थ माता-पिता के बच्चे, जेल में बंद अभिभावकों के बच्चे और अनाथ बच्चों को बाल देखभाल एवं संरक्षण से संबंधित कानून के तहत संस्था में प्रवेश दिया जाता है। कोंकण संभागीय उपायुक्त सुवर्णा पवार ने समिति को बताया कि अनाथ बच्चों को अनाथ प्रमाणपत्र जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर पर सकारात्मक कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही संस्था और सरकार के सहयोग से लड़कियों के 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद उनके आवास और पुनर्वास के लिए महिला छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध है। दौरे के दौरान समिति ने भोजन कक्ष, स्वच्छता व्यवस्था, छात्राओं और बच्चों के आवास के साथ सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। सदस्यों ने छात्राओं और बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, अनुभवों और अपेक्षाओं को जाना। समिति ने छात्राओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और सक्षम सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा उच्च शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक उपायों पर भी चर्चा की।

