Wednesday, April 22, 2026
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स्टाफ की भारी कमी से जूझ रही न्यायपालिका, लंबित मामलों का बढ़ता बोझ चिंता का कारण

मुंबई। मुंबई में न्यायपालिका इस समय स्टाफ की गंभीर कमी के संकट से गुजर रही है, जिसका सीधा असर कोर्ट के कामकाज पर पड़ रहा है। विभिन्न न्यायालयों के अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की कमी के कारण मामलों के निपटारे में देरी हो रही है, जिससे लंबित मामलों (बैकलॉग) की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और न्याय मिलने की प्रक्रिया धीमी पड़ती जा रही है। इस स्थिति का सबसे अधिक असर मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों पर देखा जा रहा है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में पहले से ही मुआवजे के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण अब यह देरी और बढ़ गई है। इससे दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता मिलना मुश्किल होता जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां एक ओर राज्य में बेरोजगारी दर बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कोर्ट में 50 से अधिक पद अभी भी खाली पड़े हैं। यह स्थिति सरकारी नीतियों पर सवाल खड़े कर रही है। खाली पदों के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ गया है, जिससे उनकी कार्यक्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर संबंधित कोर्ट की बार एसोसिएशनों ने पिछले कई वर्षों से सरकार से लगातार संपर्क किया है। विभिन्न स्तरों पर पत्र, प्रतिनिधित्व और मांगों के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार की ओर से बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होने से नाराजगी बढ़ रही है। अगर इतिहास पर नजर डालें, तो मुंबई में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल पहले काला घोड़ा स्थित जहागीर हवेली में संचालित होता था। बाद में 1986 में इसे स्थान की कमी के चलते छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस परिसर में स्थानांतरित किया गया, जहां बढ़ते मामलों को देखते हुए अतिरिक्त जगह भी उपलब्ध कराई गई। हालांकि भौतिक सुविधाओं में वृद्धि के बावजूद मानव संसाधन की कमी अब भी बनी हुई है। मौजूदा हालात में, कई पद लंबे समय से रिक्त हैं और हर साल कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से यह संकट और गहराता जा रहा है। कम स्टाफ पर बढ़ते कार्यभार ने कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर दिया है और इसका असर पूरी न्याय व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ऐसे में अब सरकार से यह मांग तेज हो गई है कि न्यायालयों में खाली पदों को तुरंत भरा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई, तो न केवल मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर न्याय और मुआवजा भी मिल सकेगा।

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