पापी’ शुभम यादव गिरफ्तार, कफन की गद्दारी पर कानून का तगड़ा प्रहार!

जौनपुर, उत्तर प्रदेश (इंद्र यादव)। जौनपुर के सिकरारा वाले शुभम यादव का जो ‘लुका-छिपी’ का बिज़नेस चल रहा था, उस पर एसटीएफ ने ताला मार दिया है। ये भाई साहब अपने आप को बहुत बड़ा ‘विलेन’ समझ रहे थे, पर भूल गए कि कानून के हाथ इतने लंबे होते हैं कि सीधा गर्दन पर ही आकर रुकते हैं!
क्या था असली माजरा: एकदम दिल तोड़ने वाला है बॉस। एक बंदा (रमाकांत) बेचारा मुंबई की चिलचिलाती धूप में पसीना बहाकर पैसा कमाता है। अपने दोस्त शुभम को ज़रूरत पड़ने पर पैसे उधार देता है। और जब अपना पैसा वापस माँगा, तो शुभम को मिर्ची लग गई!शुभम ने अपने दोस्त के साथ मिलकर उस ‘दोस्ती’ का कत्ल कर दिया जिसने उसे मुसीबत में सहारा दिया था। टाटा जेस्ट कार में बिठाया, लोहे की रॉड निकाली और सामधगंज के पास उस भरोसे का गला घोंट दिया। मतलब, “जिस थाली में खाया, उसी में छेद कर दिया!” बेचारा रमाकांत मुंबई से घर की खुशियाँ लेकर आ रहा था, पर उसे क्या पता था कि रास्ते में उसका दोस्त ही काल बनकर खड़ा है। एसटीएफ का ‘धमाकेदार’ एक्शन शुभम मियां को लगा कि नोएडा, बनारस और प्रतापगढ़ की गलियों में छुपकर वो ‘अंडरग्राउंड’ किंग बन जाएंगे। पर प्रयागराज एसटीएफ की टीम (निरीक्षक जय प्रकाश राय और उनकी पलटन) ने वो जाल बिछाया कि मछलीशहर हाइवे के मलसिल मोड़ पर ये भाई साहब ऐसे फंसे जैसे चूहेदानी में चूहा। ईनाम: ₹50,000 (जो अब सरकारी तिजोरी में ही रह गए!)। शाम के 6:30 बजे, जब ये सोच रहे थे कि अब कहाँ भागें, तभी टीम ने बोला— “अपुन इधर ही है, किधर जा रहा हैं। अब शुभम बाबू जेल की सलाखों के पीछे बैठकर ये सोच रहे होंगे कि काश वो उधार चुका दिया होता। रड मारने से अच्छा था मेहनत करके पैसे लौटा देते। अब न वो पैसा बचा, न वो दोस्ती, और इज्जत तो पहले ही तेल लेने चली गई थी। पुलिस ने धारा 103(1) और 238 बीएनएस के तहत इनका पूरा बायोडाटा सेट कर दिया है। पैसा आता-जाता है भाई, पर दोस्ती और भरोसा एक बार टूट गया तो दोबारा नहीं जुड़ता। और हाँ, पुलिस से भागना तो एकदम ‘इम्पॉसिबल’ टास्क है!
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