इंद्र यादव/मुंबई। स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) ने मुंबई में झुग्गी पुनर्वसन परियोजनाओं के नाम पर चल रहे बड़े खेल पर अब कड़ा रुख अपना लिया है। मुंबईभर में ऐसे 219 रिहैब प्रोजेक्ट्स की पहचान की गई है, जहां बिल्डरों ने बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) लिए ही पात्र झुग्गीवासियों को फ्लैटों में शिफ्ट कर दिया। अब इन सभी परियोजनाओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। हैरानी की बात यह है कि एक तरफ राज्य सरकार बिना OC वाली इमारतों को राहत देने के लिए “एमनेस्टी स्कीम” यानी माफी योजना लाने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर SRA ने बिल्डरों की कथित मनमानी और नियमों के उल्लंघन पर अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। क्या है पूरा मामला नियमों के अनुसार SRA योजना के तहत बनने वाली किसी भी पुनर्वसन इमारत में लोगों को बसाने से पहले बिल्डर को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है। OC यह प्रमाणित करता है कि इमारत सभी कानूनी, तकनीकी और सुरक्षा मानकों को पूरा करती है और उसमें रहने की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन SRA की जांच में मुंबई के 24 प्रशासनिक वार्डों में ऐसी 219 इमारतें सामने आईं, जहां डेवलपर्स ने बिना OC प्राप्त किए ही लोगों को फ्लैटों की चाबियां सौंप दीं। इससे हजारों परिवार अब ऐसी इमारतों में रहने को मजबूर हैं, जिन्हें कानूनी रूप से पूरी तरह मान्यता प्राप्त नहीं है। बिल्डरों का खेल, जनता की परेशानी अधिकारियों के अनुसार कई बिल्डरों ने झोपड़पट्टीवासियों को दिए जाने वाले मासिक किराए से बचने के लिए जल्दबाजी में लोगों को इमारतों में शिफ्ट कराया। पुनर्वसन परियोजनाओं में जब तक निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक डेवलपर को विस्थापित परिवारों को किराया देना पड़ता है। आरोप है कि इसी खर्च से बचने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। इतना ही नहीं, बिना OC के कब्जा मिलने के कारण रहवासियों को बिल्डिंग के रखरखाव के लिए मिलने वाला कॉर्पस फंड भी नहीं मिल पा रहा है। कई इमारतों में पानी, सीवर, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भारी समस्या बनी हुई है क्योंकि बिना OC के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से स्थायी कनेक्शन और मंजूरियां नहीं मिलतीं। किन इलाकों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी SRA के सर्वे में सबसे अधिक अनियमितताएं H-East वार्ड यानी बांद्रा पूर्व क्षेत्र में पाई गईं। इसके अलावा मालाड पूर्व, अंधेरी पूर्व, अंधेरी पश्चिम, मुलुंड और भांडुप में भी बड़ी संख्या में बिना OC वाली इमारतें पाई गई हैं। SRA CEO की दो टूक: FIR भी होगी, कार्रवाई भी डॉ महेंद्र कल्याणकर ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि प्राधिकरण ने बड़े पैमाने पर जांच शुरू कर दी है और कुछ दोषी डेवलपर्स के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि बिल्डरों ने इमारतों को नियमानुसार नियमित नहीं कराया तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। SRA ने यह नोटिस महाराष्ट्र प्रादेशिक एवं नगर रचना अधिनियम 1966 (MRTP Act) की धारा 53(1) के तहत जारी किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यदि सुनवाई के बाद भी अनियमितताएं दूर नहीं की गईं तो अवैध निर्माण हटाने या बुलडोजर कार्रवाई तक की नौबत आ सकती है। सरकार की राहत योजना पर भी सवाल गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसंबर में एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में मुंबई की लगभग 20 हजार बिना OC वाली इमारतों को नियमित करने के लिए संशोधित ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट योजना लाने की घोषणा की थी। सरकार का दावा है कि इससे मुंबई के करीब 10 लाख लोगों को राहत मिल सकती है। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिल्डर सरकार की इस नरमी का फायदा उठाकर नियमों की अनदेखी करते रहे? और क्या हजारों परिवारों को बिना मूलभूत सुविधाओं वाली इमारतों में रहने के लिए मजबूर करना केवल “प्रशासनिक चूक” माना जा सकता है? फिलहाल SRA की कार्रवाई ने मुंबई के रिहैब सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह कार्रवाई वास्तव में दोषी बिल्डरों तक पहुंचेगी या फिर मामला केवल नोटिसों और फाइलों तक सीमित रह जाएगा।