
मुंबई। महाराष्ट्र के मत्स्यव्यवसाय और बंदर मंत्री नितेश राणे ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह नए-नए आय स्रोतों की तलाश कर अपने राजस्व में वृद्धि करे और सरकारी अनुदान पर निर्भरता कम करे। मंत्रालय में आयोजित एक समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि आय बढ़ाने के लिए तय की गई सभी उपाय योजनाओं को बिना देरी के लागू किया जाए और विभाग को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। बुधवार को हुई महाराष्ट्र सागरी मंडल की 85वीं संचालक मंडल बैठक में स्वीकृत प्रस्तावों की प्रगति, भूमि प्रबंधन तथा समुद्री तट और जलकिनारों के उपयोग से संबंधित नीतियों की समीक्षा की गई। इस अवसर पर महाराष्ट्र सागरी मंडल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी. प्रदीप, मुख्य प्रशासकीय अधिकारी प्रदीप बढ़िये, विधि एवं न्याय विभाग के उपसचिव साखरे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री नितेश राणे ने कहा कि मत्स्यव्यवसाय और बंदर विभाग को आय बढ़ाने के लिए चुने गए विकल्पों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई पूरी करनी चाहिए। जब विभाग के अपने आय स्रोत विकसित होंगे, तब वह अधिक प्रभावी और सक्रिय रूप से विकास कार्य कर सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजस्व वृद्धि के साथ-साथ विभाग को राज्य के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र की समुद्री तटरेखा के लिए एक प्रभावी विज्ञापन नीति तैयार करने तथा तटीय क्षेत्रों में छोटे बंदरगाहों की सीमा में किराये पर दिए जाने वाले स्टॉल्स से संबंधित अधिसूचनाएं जल्द जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही समुद्र तट से सटे भू-भाग के प्रबंधन और जलकिनारों के उपयोग के लिए निवेशकों को आकर्षित करने वाली व्यापक नीति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। मंत्री राणे ने कहा कि इसके लिए जीआईएस आधारित पोर्टल विकसित किया जाए और अन्य समुद्री तट वाले राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर निवेश को सरल बनाने वाले नियम तैयार किए जाएं। इससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि पहले स्पष्ट नीति तैयार की जाए और उसके बाद बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अलग नीति लाई जाए।



