Friday, May 8, 2026
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एल नीनो के मद्देनज़र जलसंरक्षण कार्य युद्धस्तर पर पूरे करें: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

भूजल स्तर बढ़ाने और जलयुक्त शिवार 2.0 के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

मुंबई। संभावित एल नीनो परिस्थितियों को देखते हुए राज्य में जलसंरक्षण और जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 के अंतर्गत चल रहे कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। जिन क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार घट रहा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम कर भूजल स्तर बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। यह निर्देश देवेंद्र फडणवीस ने दिए। शुक्रवार केपी मुख्यमंत्री ने ‘वर्षा’ शासकीय निवास पर मृदा एवं जलसंरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में संजय राठोड, विभागीय सचिव जितेंद्र पापळकर, मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, जल विषयक सलाहकार श्रीराम वेदिरे सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि एल नीनो की संभावना को देखते हुए राज्य में भूजल स्तर बढ़ाना बेहद आवश्यक है। इसके लिए जलसंरक्षण और जलयुक्त शिवार अभियान के कार्यों को प्राथमिकता देकर समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जलयुक्त शिवार 2.0 में शामिल गांवों में आवश्यक मरम्मत कार्यों को भी तत्काल आराखड़े में शामिल कर पूरा किया जाए। राज्यस्तरीय आराखड़ों को 15 मई से पहले मंजूरी देने और जिलों को संशोधित योजनाएं भेजकर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत जी राम जी’ योजना में जलसंरक्षण कार्यों पर विशेष जोर दिया गया है, जिसका लाभ महाराष्ट्र को मिलना चाहिए। नालों के गहरीकरण के बाद दोबारा गाद जमा न हो, इसके लिए नालों के किनारे बांस रोपण करने पर भी विचार करने को कहा गया। विदर्भ क्षेत्र के मालगुजारी तालाबों की मरम्मत जून तक पूरी करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजना के लिए अतिरिक्त निधि प्राप्त करने हेतु वे स्वयं केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। मंत्री संजय राठोड ने बताया कि विभागीय आकृतिबंध को मंजूरी मिलने के बाद कार्यों में तेजी आई है। वर्तमान में पहले से स्वीकृत परियोजनाओं को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने मालगुजारी तालाबों पर हुए अतिक्रमण हटाने की अनुमति देने की भी मांग की। विभागीय सचिव जितेंद्र पापळकर ने जानकारी दी कि जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 के अंतर्गत अब तक 1 लाख 44 हजार 697 कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 1 लाख 10 हजार 120 कार्य पूरे हो चुके हैं। शेष कार्य प्रगति पर हैं और उन्हें शीघ्र पूरा करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि टैंकर प्रभावित और भूजल स्तर घटे हुए गांवों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू किए गए हैं। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किए गए जलसंरक्षण कार्यों की भौतिक जांच भी जारी है। अब तक 15 लाख 15 हजार कार्यों में से 12 लाख 27 हजार संरचनाओं का स्थल सत्यापन किया जा चुका है। ‘गाळमुक्त धरण, गाळयुक्त शिवार’ अभियान के अंतर्गत इस वर्ष 1435 जलस्रोतों से 477.73 लाख घनमीटर गाद निकाली गई, जिससे 30 हजार 835 घनमीटर जल भंडारण क्षमता पुनर्स्थापित हुई और 73 हजार 417 एकड़ भूमि उपजाऊ बनी है। 15 जून तक जिलावार गाद निकालने का कार्य पूरा करने की योजना बनाई गई है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजना के अंतर्गत अब तक 22 हजार कार्य पूरे कर उनके जियो टैगिंग की गई है। इसके अलावा पाणलोट विकास योजना के तहत 57 अमृत सरोवर विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 31 सरोवर 15 जून तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य के 27 हजार 942 सूक्ष्म पाणलोट क्षेत्रों में 1 लाख 21 हजार 583 कार्य प्रस्तावित किए गए हैं।

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