
के रवि(दादा) /सोलापुर। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के माळशिरस तालुका स्थित मालिनगर के जयसिंहनगर निवासी 22 वर्षीय दिव्यांग युवक करण भारत करडे का सपना था कि उसके परिवार के पास अपना एक घर हो। 95 प्रतिशत दिव्यांग करण ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अपने परिवार के लिए एक स्थायी आशियाने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। हालांकि, ग्राम पंचायत और संबंधित प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद यह सपना पूरा नहीं हो सका और कुछ दिन पहले उसके निधन के साथ ही यह उम्मीद भी अधूरी रह गई।करण अपने माता-पिता मनीषा करडे और भारत करडे के साथ वर्षों से किराए के मकान में रह रहा था। परिवार ने 10 नवंबर 2023 को पंचायत समिति माळशिरस के गट विकास अधिकारी और तहसीलदार के समक्ष जमीन उपलब्ध कराने और आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए आवेदन किया था। परिवार का आरोप है कि उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया जाता था कि गांव में उपलब्ध जमीन नहीं है। सामाजिक संगठनों और दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले को उठाया तथा परिवार को जमीन उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।करण की स्थिति ऐसी थी कि उसकी देखभाल पूरी तरह उसकी मां को करनी पड़ती थी। इसके बावजूद वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी को अपना कर्तव्य मानता था और हर चुनाव में अपनी मां की गोद में बैठकर मतदान केंद्र तक पहुंचता था। परिवार का कहना है कि चुनाव के दौरान कई जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने उसे जमीन और घर दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन ये वादे हकीकत में नहीं बदल सके।करण के निधन के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। सामाजिक संगठनों ने इस घटना को केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों की पीड़ा का प्रतीक बताया है जो वर्षों तक सरकारी योजनाओं के लाभ की प्रतीक्षा करते रहते हैं। यह घटना ग्रामीण आवास योजनाओं के क्रियान्वयन, पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।



