
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अशोक खरात से जुड़े मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसका खुलासा खुफिया जानकारी के आधार पर हुआ है और पूरे प्रकरण पर उच्च स्तर से कड़ी निगरानी रखी जा रही है। वे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को पहले से अंदेशा था कि सामाजिक कलंक और बदनामी के डर से कई महिलाएं सामने आने में हिचकिचा सकती हैं। इसी कारण पीड़ितों और उनके परिवारों को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं और कुछ महिलाएं आगे आकर अपने अनुभव साझा कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक को स्वयं जांच की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जिसमें नासिक के पुलिस आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ठोस सबूत हैं, तो उन्हें सामने लाया जाए ताकि बिना देरी के कार्रवाई हो सके। साथ ही उन्होंने बिना प्रमाण के आरोप लगाने और मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिशों की आलोचना करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास ऐसे प्रमाण हैं, जिनसे यह दिखाया जा सकता है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग भी अशोक खरात के संपर्क में रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इन तथ्यों पर कार्रवाई करना पुलिस का काम है और जांच पूरी तरह निष्पक्ष एवं पेशेवर तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल किसी व्यक्ति के संपर्क में होने या तस्वीरें होने के आधार पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए, लेकिन यदि कोई व्यक्ति गलत गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले से जुड़े कुछ बिंदुओं पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने पूछा कि 40 किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइन जैसी सुविधाएं आखिर कैसे उपलब्ध कराई गईं और किस स्तर पर इसकी अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की हर पहलू से जांच की जाएगी, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं की भी पड़ताल शामिल है। फडणवीस ने इस मामले को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा बताते हुए कहा कि इसे राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के शोषण के लिए प्रभाव और पद के दुरुपयोग की कड़ी निंदा करते हुए इसे जघन्य अपराध बताया। उन्होंने दोहराया कि दोषियों को किसी भी हालत में छोड़ा नहीं जाएगा, चाहे वे किसी भी पद या ओहदे पर क्यों न हों। सरकार और पुलिस न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और जब तक जवाबदेही तय नहीं हो जाती, तब तक कार्रवाई जारी रहेगी।




