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महाराष्ट्र में पहली से दसवीं तक मराठी पढ़ाना अनिवार्य, नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर एक लाख रुपये तक जुर्माना, मान्यता भी होगी रद्द

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सभी माध्यमों की स्कूलों में कक्षा पहली से दसवीं तक मराठी भाषा पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। इस नियम का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि इसके बाद भी संबंधित स्कूल मराठी पढ़ाने के नियम का पालन नहीं करता है, तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। सोमवार को यह जानकारी राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने विधानसभा में दी। शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने बताया कि मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने संबंधी कानून लागू होने के बाद अब राज्य के सभी माध्यमों—चाहे वे मराठी, हिंदी, अंग्रेजी या अन्य किसी भी भाषा के हों—की स्कूलों में पहली से दसवीं कक्षा तक मराठी विषय पढ़ाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि केवल मराठी विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि स्कूलों को मराठी पढ़ाने के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता रखने वाले शिक्षकों की नियुक्ति भी करनी होगी। शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल निरीक्षण के दौरान यह जांच की जाएगी कि मराठी विषय का नियमित अध्यापन हो रहा है या नहीं तथा प्रत्येक कक्षा में मराठी विषय की परीक्षा भी आयोजित की जा रही है या नहीं।
नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो स्कूल मराठी भाषा नहीं पढ़ाएंगे, उनके खिलाफ पहले चरण में एक लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इसके बाद भी यदि स्कूल नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसकी सरकारी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। दादाजी भुसे ने बताया कि राज्य सरकार ने स्कूलों के नए पाठ्यक्रम में महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अधिक महत्व देने का निर्णय लिया है। इसके तहत महात्मा ज्योतिराव फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान को अधिक प्रभावी ढंग से शामिल किया जाएगा। इसके अलावा विद्यार्थियों को महाराष्ट्र के महापुरुषों के विचारों और योगदान से परिचित कराने के उद्देश्य से राज्य के गौरवशाली इतिहास और प्रमुख विभूतियों के जीवन व कार्यों को भी नए पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।
छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास अब राष्ट्रीय स्तर पर अधिक विस्तार से पढ़ाया जाएगा
शिक्षा मंत्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम में पहले की तुलना में अधिक व्यापक रूप से शामिल किया गया है। इसके परिणामस्वरूप अब देशभर के विद्यार्थियों को शिवाजी महाराज के जीवन, कार्य और स्वराज्य की अवधारणा का विस्तृत अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
‘जय जय महाराष्ट्र माझा’ के सम्मानपूर्ण गायन के निर्देश
दादाजी भुसे ने कहा कि मराठी भाषा राज्य की अस्मिता और पहचान का विषय है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रगान के बाद महाराष्ट्र के राज्यगीत ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’ का सम्मानपूर्वक गायन सुनिश्चित किया जाए। विधानसभा में यह विषय विधायक अतुल भातखलकर द्वारा उठाए गए प्रश्न के दौरान चर्चा में आया। इस पर विधायक वरुण सरदेसाई, सुनील प्रभु, डॉ. नितीन राऊत और रत्नाकर गुट्टे ने भी उप-प्रश्न पूछकर चर्चा में भाग लिया।

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