
इंद्र यादव/मुंबई/मध्य प्रदेश। जिस पुलिस अधिकारी पर आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून की रक्षा की जिम्मेदारी थी, उसी अधिकारी को एक महिला के साथ दुष्कर्म के मामले में अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। मध्य प्रदेश पुलिस के पूर्व अधिकारी अनिल मिश्रा से जुड़ा यह मामला पुलिस व्यवस्था में पद और अधिकार के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मामला वर्ष 2012 से जुड़ा है। जयपुर निवासी एक महिला का पति एक मामले में जेल में बंद था। महिला अपने पति की मदद के सिलसिले में तत्कालीन पुलिस अधिकारी अनिल मिश्रा के संपर्क में आई थी। महिला को उम्मीद थी कि अधिकारी होने के नाते मिश्रा उसकी सहायता करेंगे, लेकिन इसी भरोसे का दुरुपयोग किए जाने का मामला बाद में अदालत तक पहुंचा। पीड़िता के आरोपों के अनुसार, मदद का भरोसा देकर उसे पहले भोपाल बुलाया गया और अधिकारी मेस में उसके साथ जबरदस्ती की गई। इसके बाद भी कथित तौर पर मदद के नाम पर उसका शोषण जारी रहा। मामले में जोधपुर और मुंबई ले जाकर भी उसके साथ दुष्कर्म किए जाने तथा उसके बैंक खाते से पैसे निकलवाने के आरोप सामने आए।मामले में पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ अश्लील हरकत किए जाने का आरोप भी शामिल था। महिला ने 11 जुलाई 2014 को शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने प्रकरण की जांच करते हुए कार्रवाई की। अनिल मिश्रा पुलिस विभाग में डीएसपी सहित विभिन्न पदों पर रह चुके थे और बाद में एआईजी के पद तक पहुंचे। ऐसे में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इस तरह के गंभीर अपराध में दोषी पाया जाना पुलिस व्यवस्था और वर्दी से जुड़े जनविश्वास के लिए गंभीर मामला है। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने मामले में अनिल मिश्रा को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अन्य अपराध के लिए तीन वर्ष की सजा भी सुनाए जाने की जानकारी है। यह मामला केवल एक दोषी अधिकारी को मिली सजा तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठाता है कि जब कोई पीड़ित व्यक्ति सहायता की उम्मीद में किसी प्रभावशाली अधिकारी के पास पहुंचता है, तब उसके अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी मजबूत है। पुलिस की वर्दी अधिकार के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी देती है। किसी अधिकारी द्वारा अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल पीड़ित की सहायता करने के बजाय उसके शोषण के लिए किया जाना उस भरोसे पर चोट है, जिसके आधार पर नागरिक पुलिस से न्याय और सुरक्षा की उम्मीद करते हैं। अदालत का फैसला यह संदेश देता है कि पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है। साथ ही यह मामला पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही, महिलाओं और बच्चों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई तथा पीड़ितों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

