
मुंबई। सेकेंड हैंड कारों की खरीद-बिक्री के बढ़ते बाजार के बीच ओनरशिप ट्रांसफर को लेकर लोगों की चिंताएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। कई बार कार बेचने के बाद भी आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) ट्रांसफर में देरी होने से पुराने मालिक को ट्रैफिक चालान, कानूनी नोटिस और वाहन के गलत इस्तेमाल जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए spinny.com ने अपनी ‘सैलर प्रोटेक्शन पॉलिसी’ शुरू की है, जो कार बेचने वालों को अतिरिक्त सुरक्षा और कानूनी संरक्षण प्रदान करती है। इस पॉलिसी के तहत, कार हैंडओवर होने के बाद से लेकर आरसी आधिकारिक रूप से नए खरीदार के नाम ट्रांसफर होने तक वाहन से जुड़ी किसी भी कानूनी या प्रशासनिक जिम्मेदारी को स्पिनी अपने ऊपर लेता है। कंपनी का दावा है कि इस दौरान यदि कोई ट्रैफिक चालान जारी होता है, वाहन का गलत इस्तेमाल होता है या किसी कानूनी विवाद की स्थिति बनती है, तो उसका समाधान और कानूनी सहयोग स्पिनी द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।कंपनी के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में संचालन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन के चलते आरसी ट्रांसफर प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है। स्पिनी का कहना है कि खरीदार द्वारा वाहन खरीदने के बाद 12 महीनों के भीतर आरसी ट्रांसफर की उच्च सफलता दर हासिल की गई है, जिससे विक्रेताओं की अनिश्चितता काफी कम हुई है। कंपनी को ग्राहकों से 4.5 स्टार रेटिंग भी प्राप्त हुई है, जो इसकी सेवाओं में बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।आमतौर पर सेकेंड हैंड कार डीलरशिप्स आरसी ट्रांसफर के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहती हैं, जिससे जवाबदेही कम हो जाती है। इसके विपरीत, स्पिनी का फुल-स्टैक मॉडल पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित करता है। कंपनी डिजिटल ट्रैकिंग और दस्तावेज सत्यापन के माध्यम से ट्रांसफर प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने का दावा करती है।स्पिनी की सैलर प्रोटेक्शन पॉलिसी के तहत विक्रेताओं को कई सुविधाएं दी जा रही हैं, जिनमें वाहन की तुरंत कीमत का आकलन, उसी दिन भुगतान, दस्तावेजों में सहायता और मंत्रालय के नियमों के अनुरूप प्रक्रिया शामिल है। कंपनी आधार, पैन, बैंक डिटेल्स और एग्रीमेंट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का सत्यापन भी करती है।पॉलिसी के प्रमुख लाभों में हैंडओवर के बाद जारी ट्रैफिक चालानों की जिम्मेदारी, वाहन के गलत इस्तेमाल से सुरक्षा, किसी भी कानूनी विवाद की स्थिति में सहायता और स्पिनी की कस्टडी साबित करने वाले सत्यापित दस्तावेज शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य सेकेंड हैंड कार बेचने की प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।




