Friday, May 15, 2026
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महाराष्ट्र में कौशल आधारित शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा: नए स्किल सेंटर और 17 तकनीकी महाविद्यालयों को मंजूरी

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने कौशल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन देने और युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के उद्देश्य से राज्य में नए कौशल केंद्रों को मंजूरी देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य में शैक्षणिक वर्ष 2030-31 तक नए बी.फार्मेसी और डी.फार्मेसी संस्थानों को अनुमति नहीं दी जाएगी, जबकि आदिवासी, पहाड़ी और पिछड़े जिलों में नए तकनीकी महाविद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दी जाएगी। यह निर्णय मंत्रालय में आयोजित महाराष्ट्र राज्य उच्च शिक्षा एवं विकास आयोग (माहेड) की बैठक में लिया गया। बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
7 जिलों में खुलेंगे नए तकनीकी महाविद्यालय
सरकार ने गडचिरोली, नंदुरबार, हिंगोली, वाशिम, धाराशिव, सिंधुदुर्ग और परभणी जैसे पिछड़े जिलों में अभियांत्रिकी, वास्तुशास्त्र, एचएमसीटी तथा बी. वोक पाठ्यक्रमों के कुल 17 नए महाविद्यालय शुरू करने को मंजूरी दी है। इन संस्थानों का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि बदलती तकनीक, उद्योगों की आवश्यकताओं और रोजगार के नए अवसरों को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा, प्रशिक्षण और उद्योग सहभागिता पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि रतन टाटा स्टेट स्किल यूनिवर्सिटी के माध्यम से मुंबई, नवी मुंबई, पुणे और नागपुर में उद्योग आधारित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। अब तक करीब 61 हजार विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
‘ह्यूमन कैपिटल’ से ‘टैलेंट कैपिटल’ की ओर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), राष्ट्रीय कौशल पात्रता ढांचा (NSQF) और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCRF) के अनुरूप तैयार पाठ्यक्रम युवाओं को अधिक रोजगारक्षम बना रहे हैं। राज्य सरकार ‘ह्यूमन कैपिटल’ को ‘टैलेंट कैपिटल’ में बदलने की दिशा में काम कर रही है।
समाजकार्य को मिलेगा स्वतंत्र विद्याशाखा का दर्जा
राज्य के पारंपरिक महाविद्यालयों में ‘समाजकार्य’ विषय को स्वतंत्र विद्याशाखा के रूप में शुरू करने का निर्णय भी लिया गया है। इसका उद्देश्य बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों का ज्ञान उपलब्ध कराना है।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर तंत्रशास्त्र विश्वविद्यालय का नया आराखड़ा मंजूर
बैठक में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर तंत्रशास्त्र विश्वविद्यालय का वर्ष 2025-2031 के लिए बृहद आराखड़ा भी मंजूर किया गया। विश्वविद्यालय को उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाने, प्रयोगशालाओं और अनुसंधान को मजबूत करने तथा पाठ्यक्रमों को उद्योगानुकूल बनाने के निर्देश दिए गए।
नए फार्मेसी कॉलेजों पर रोक
सरकार ने फैसला किया है कि शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से 2030-31 तक राज्य में नए बी. फार्मेसी और डी. फार्मेसी संस्थानों को अनुमति नहीं दी जाएगी और वर्तमान संस्थानों की प्रवेश क्षमता भी नहीं बढ़ाई जाएगी। सरकार का मानना है कि अब गुणवत्ता सुधार पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

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