Tuesday, April 21, 2026
Google search engine
HomeIndiaबिखरता बचपन, पिटती जवानी और स्वार्थ में डूबा बुढ़ापा—समाज के आईने में...

बिखरता बचपन, पिटती जवानी और स्वार्थ में डूबा बुढ़ापा—समाज के आईने में कड़वी सच्चाई

मुंबई (इंद्र यादव)। एक ओर देश डिजिटल प्रगति और वैश्विक ताकत बनने के सपनों की बात करता है, तो दूसरी ओर जमीनी हकीकत में समाज की तीनों पीढ़ियों—बचपन, जवानी और बुढ़ापा—की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। यह तस्वीर केवल सामाजिक असंतुलन ही नहीं, बल्कि भविष्य के संकट की ओर भी इशारा करती है।बचपन, जिसे राष्ट्र की नींव माना जाता है, आज सबसे ज्यादा असुरक्षित दिखाई देता है। सरकारी स्कूलों की कमजोर व्यवस्था और निजी शिक्षा की महंगाई के कारण बड़ी संख्या में बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से दूर हो रहे हैं। इस खालीपन का फायदा नशा तस्कर उठा रहे हैं, जिसके चलते कई बच्चे कम उम्र में ही गलत रास्तों की ओर बढ़ रहे हैं। यह स्थिति न केवल उनके भविष्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि समाज की बुनियाद को भी कमजोर कर रही है।वहीं देश की जवानी, जो ऊर्जा और नवाचार का प्रतीक होती है, आज निराशा और संघर्ष के दौर से गुजर रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी ने युवाओं के विश्वास को झकझोर दिया है। जब यही युवा अपने अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो उन्हें अक्सर सख्ती का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगने के बजाय विरोध और संघर्ष में खर्च हो रही है।तीसरी ओर, समाज के अनुभवी वर्ग—जो दिशा देने की जिम्मेदारी निभाते हैं—उन पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नीति-निर्माण में दूरदर्शिता के बजाय तात्कालिक लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है। यदि मार्गदर्शक ही स्वार्थ से प्रेरित होंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए संतुलित और सुरक्षित भविष्य की कल्पना कठिन हो जाती है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। बचपन को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं को पारदर्शी रोजगार अवसर और अनुभवी वर्ग को जिम्मेदार नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी।अंततः यह केवल किसी एक वर्ग या संस्था की विफलता नहीं, बल्कि पूरे तंत्र और समाज के लिए चेतावनी है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी अधिकारों को सुनिश्चित करना ही एक सुरक्षित और संतुलित समाज की आधारशिला है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments