
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में गुरुवार को राज्य के जलसंपदा विभाग और तात्यासाहेब कोरे वारणा नवशक्ती निर्माण संस्था के बीच लगभग 5,200 करोड़ रुपए के तीन पंप्ड स्टोरेज (उदंचन) जलविद्युत परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) किया गया। इस पहल को महाराष्ट्र की ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से कम लागत में बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण संभव होगा, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड को स्थिर रखने में मदद मिलेगी और भविष्य की बढ़ती बिजली मांग को पूरा किया जा सकेगा।
तीन बड़े प्रोजेक्ट्स से 1100 मेगावाट बिजली उत्पादन
इस समझौते के तहत कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग क्षेत्र में दो तथा शाहूवाड़ी में एक पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे। इन तीनों परियोजनाओं से कुल 1100 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित होगी और लगभग 1100 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। कुंभी (भाग-A) – 600 मेगावाट, 2784 करोड़ रुपए का निवेश, कुंभी (भाग-B) – 300 मेगावाट, 1434 करोड़ रुपए का निवेश एवं कडवी प्रोजेक्ट – 200 मेगावाट, 981 करोड़ रुपए का निवेश।
पंप्ड स्टोरेज में महाराष्ट्र की मजबूत पकड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां राजस्थान और गुजरात जैसे राज्य सौर ऊर्जा में आगे हैं, वहीं महाराष्ट्र की असली ताकत पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में है। राज्य पहले ही 80,000 मेगावाट से अधिक क्षमता हासिल कर चुका है और ऐसे प्रोजेक्ट्स भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम साबित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में तेजी से डेटा सेंटर स्थापित हो रहे हैं, जिससे अगले 3-4 वर्षों में बिजली की मांग में भारी वृद्धि होगी। ऐसे में ऊर्जा भंडारण और स्थिर आपूर्ति के लिए ये परियोजनाएं जरूरी हैं।
सरकार देगी ‘एंकर प्रोजेक्ट’ का दर्जा
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इन परियोजनाओं को ‘एंकर प्रोजेक्ट’ के रूप में सहयोग दिया जाएगा। सरकार पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) और वित्तीय सहायता के मामले में सकारात्मक भूमिका निभाएगी, जिससे परियोजनाओं को गति मिलेगी। जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स से स्वच्छ और सतत ऊर्जा उत्पादन संभव होगा। इससे राज्य में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और भविष्य में 1 लाख मेगावाट क्षमता हासिल करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
इन परियोजनाओं से न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि कोल्हापुर, सिंधुदुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही, सहकार क्षेत्र का ऊर्जा उत्पादन में प्रवेश राज्य के लिए एक नया मॉडल साबित हो सकता है।




