
मुंबई। पर्यावरण संरक्षण और भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए वर्षा जल का अधिकतम संचयन और उसे जमीन में समाहित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बारिश के बहकर जाने वाले पानी को रोककर भूगर्भ में पहुंचाना तथा मिट्टी के कटाव को रोकना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘गाद रहित बांध, गाद युक्त खेत’ अभियान में प्रत्येक नागरिक को सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। रविवार को यह अपील महाराष्ट्र के मृदा एवं जलसंधारण मंत्री संजय राठौड़ ने की। मंत्री राठौड़ ने बताया कि मृदा एवं जलसंधारण विभाग पिछले कई वर्षों से राज्यभर में जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। वर्तमान में विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ‘गाद रहित बांध, गाद युक्त खेत’ अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के तालाबों, बांधों और जलाशयों में वर्षों से बड़ी मात्रा में गाद जमा हो गई है। यह गाद किसानों के लिए किसी सोने से कम नहीं है, क्योंकि यह प्राकृतिक जैविक खाद का काम करती है। यदि जलाशयों से गाद निकालकर खेतों या कृषि भूमि में डाली जाए तो इसके दोहरे लाभ मिलते हैं। एक ओर जलाशयों की जल भंडारण क्षमता बढ़ती है और पानी अधिक समय तक उपलब्ध रहता है, वहीं दूसरी ओर खेतों की उर्वरता बढ़ने से फसल उत्पादन में वृद्धि होती है और किसानों की आय में सुधार होता है। मंत्री राठौड़ ने कहा कि राज्यभर में छोटे-छोटे बांधों का निर्माण, नालों का गहरीकरण और चौड़ीकरण, वर्षा जल संचयन तथा जल संरक्षण के विविध कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। हालांकि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और नागरिकों का सहयोग भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों, किसानों और नागरिकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यदि आज हम पानी और मिट्टी को बचाने का संकल्प लेते हैं, तो आने वाली पीढ़ियां इसका लाभ उठाएंगी। पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा और किसानों की समृद्धि के लिए जलसंधारण कार्यों को जनआंदोलन का रूप देना समय की मांग है। मंत्री राठौड़ ने कहा कि “यदि पर्यावरण बचाना है और किसानों के जीवन में खुशहाली लानी है, तो जलसंधारण के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।”



