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सफाई कर्मियों के पुनर्वास को रफ्तार, महाराष्ट्र में 30 सेवा आवास कॉलोनियों का होगा पुनर्विकास

23 परियोजनाओं पर काम शुरू, बाकी सात में पुनर्वास प्रक्रिया जारी; वारिसों को नौकरी, शहरों में बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार का जोर

मुंबई। महाराष्ट्र में सफाई कर्मियों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने 46 सेवा निवास कॉलोनियों में से 30 के पुनर्विकास का निर्णय लिया है। इनमें 23 स्थानों पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जबकि शेष सात स्थानों पर निवासियों के पुनर्वास और स्थानांतरण की प्रक्रिया जारी है। नगर विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसाल ने मंगलवार को विधानसभा में नियम 293 के तहत हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह जानकारी दी।राज्यमंत्री माधुरी मिसाल ने बताया कि लाड-पागे समिति की सिफारिशों के अनुसार स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, सेवानिवृत्ति अथवा मृत्यु होने वाले सफाई कर्मियों के आश्रितों को राज्य की सभी महानगरपालिकाओं में नौकरी देने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण और कचरा प्रबंधन के दबाव को देखते हुए स्वच्छ भारत अभियान के तहत कचरा प्रसंस्करण संयंत्र, बायो-माइनिंग, एसटीपी परियोजनाओं तथा घरेलू शौचालयों के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।मिसाल ने बताया कि राज्य के आर्थिक विकास को गति देने के लिए मुंबई, पुणे, नासिक और नागपुर को ‘ग्रोथ इंजन’ शहरों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन शहरों में सड़क, पेयजल, सीवरेज, पर्यटन और एग्रो-लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी आधारभूत सुविधाओं का व्यापक विकास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि नई जल योजनाओं के कारण ठाणे शहर की पेयजल समस्या का समाधान संभव हुआ है। साथ ही गांवठाण और कोलीवाड़ा क्षेत्रों के विकास के लिए अलग नियमावली तैयार की जा रही है।स्वास्थ्य सुविधाओं का उल्लेख करते हुए राज्य मंत्री ने कहा कि महानगरपालिका अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए आरक्षित बेड की व्यवस्था का ऑडिट कराया जा रहा है। सभी अस्पतालों में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देने वाले बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया है तथा मरीजों के मार्गदर्शन के लिए ‘आरोग्य सेवक’ नियुक्त किए गए हैं। आधुनिक चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि मुंबई के कोस्टल रोड, अटल सेतु, मिसिंग लिंक और मेट्रो-3 जैसे प्रमुख आधारभूत परियोजनाओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ‘वॉर रूम’ से सीधे निगरानी की जा रही है, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजनाएं पूरी की जा सकें।फेरीवाला नीति के संबंध में उन्होंने कहा कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समितियों का गठन किया जा रहा है और ‘नो हॉकर ज़ोन’ निर्धारित किए जा रहे हैं। साथ ही राज्य की सभी महानगरपालिकाओं में अतिक्रमण विरोधी अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।

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