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महाराष्ट्र को ओरल हेल्थकेयर निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी, विदेशी निवेश और डेंटल उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार राज्य को मौखिक स्वास्थ्य (ओरल हेल्थकेयर) क्षेत्र में देश और दुनिया का अग्रणी निवेश केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के साथ-साथ घरेलू डेंटल उद्योग, अनुसंधान, कौशल विकास और मेडिकल टूरिज्म को भी नई गति देना है। यह बात राजशिष्टाचार, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, प्रवासी भारतीय मामलों एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव तथा मुख्य राजशिष्टाचार अधिकारी डॉ. राजेश गवांदे ने मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित “महाराष्ट्र : ओरल हेल्थकेयर इकोसिस्टम के लिए अग्रणी निवेश केंद्र” विषयक गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। सम्मेलन में देश-विदेश की अग्रणी डेंटल कंपनियों, उद्योग विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आईडीए) के अध्यक्ष डॉ. मनोज श्रीवास्तव, उपमुख्यमंत्री कार्यालय के संयुक्त सचिव एवं नीतिगत सलाहकार डॉ. संतोष भोसले, आईडीए के मानद महासचिव डॉ. अशोक ढोबले सहित अनेक विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे। डॉ. गवांदे ने कहा कि दंत चिकित्सा सेवाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए डेंटल उपचार को व्यापक बीमा कवरेज* के दायरे में लाना आवश्यक है। इसके लिए इंडियन डेंटल एसोसिएशन को निजी बीमा कंपनियों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। यदि दंत उपचार को बीमा सुरक्षा मिलेगी तो लोगों का उपचार की ओर रुझान बढ़ेगा और उद्योग के लिए भी नए बाजार विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के पास स्वतंत्र कौशल विकास विभाग और प्रशिक्षण की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। यदि उद्योग जगत अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल, प्रशिक्षण संरचना और उपकरणों की जानकारी देगा तो सरकार तीन माह के अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर डेंटल उद्योग के लिए प्रशिक्षित और “इंडस्ट्री रेडी” मानव संसाधन तैयार कर सकती है। उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और प्रोत्साहन योजनाओं को लेकर दिए गए सुझावों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. गवांदे ने कहा कि राज्य सरकार का ‘मैत्री’ पोर्टल उद्योगों को विभिन्न अनुमतियां और मंजूरियां आसान एवं तेज़ी से उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि डेंटल उद्योग को अलग औद्योगिक श्रेणी के रूप में प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव पर इंडियन डेंटल एसोसिएशन और उद्योग विभाग संयुक्त रूप से विस्तृत प्रस्ताव तैयार करें। राज्य सरकार विशेष रूप से महाराष्ट्र में डेंटल उत्पादों के विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के पक्ष में है और इस विषय पर जल्द ही अलग बैठक कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। डॉ. गवांदे ने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र सरकार, इंडियन डेंटल एसोसिएशन और उद्योग जगत के समन्वित प्रयासों से मौखिक स्वास्थ्य सेवाओं, डेंटल उपकरण निर्माण, अनुसंधान, कौशल विकास और डेंटल मेडिकल टूरिज्म को नई दिशा मिलेगी तथा महाराष्ट्र इस क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा। कार्यक्रम की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार के राजशिष्टाचार विभाग के अवर सचिव अविनाश सोलवट ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र देश का सबसे प्रभावशाली औद्योगिक राज्य होने के साथ वैश्विक निवेश और नवाचार का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने राज्य में क्लीनिकल सेवाओं, डेंटल शिक्षा, अनुसंधान, विनिर्माण और डेंटल टूरिज्म को जोड़ते हुए एक समग्र ओरल हेल्थकेयर इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन में हेलिऑन (सेंसोडाइन), कोलगेट-पामोलिव, यूनिकॉर्न डेनमार्ट लिमिटेड, ड्यूर डेंटल इंडिया, डेंट्सप्लाय सिरोना इंडिया, शोफू डेंटल इंडिया, डेंटल प्रोडक्ट्स ऑफ इंडिया (DPI), मेकओ-टूथसी, क्रोमाडेंट डेंटल इक्विपमेंट्स, प्रॉमिस डेंटल सिस्टम, आदि मेड प्राइवेट लिमिटेड, पिडिलाइट विजडेंट, प्रिव्हेस्ट डेनप्रो लिमिटेड और सेलाडेंट सहित कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और महाराष्ट्र में निवेश एवं कारोबार विस्तार को लेकर सरकार की सकारात्मक नीति की सराहना की।

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