
मुंबई। राज्य के मरीजों को जीवनरक्षक दवाएं और उपचार अधिक सुलभ तथा किफायती दरों पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उपलब्ध अतिरिक्त प्लाज्मा के प्रभावी उपयोग के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने अधिकारियों को दिए हैं। मंगलवार को मंत्रालय में चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ की अध्यक्षता में आयोजित चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में चिकित्सा शिक्षा एवं औषधि विभाग के सचिव धीरज कुमार, आयुक्त अनिल भंडारी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक के दौरान राज्य की रक्तपेढ़ियों (ब्लड बैंकों) में उपलब्ध अतिरिक्त प्लाज्मा के उपयोग पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि महाराष्ट्र में वर्तमान में लगभग 450 रक्तपेढ़ियां कार्यरत हैं, जिनमें से 79 सरकारी क्षेत्र की हैं, जबकि शेष निजी और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित की जा रही हैं। बैठक में बताया गया कि सरकारी क्षेत्र की रक्तपेढ़ियों में लगभग 25 हजार लीटर अतिरिक्त प्लाज्मा उपलब्ध है, जबकि निजी क्षेत्र में यह मात्रा 3 लाख लीटर से अधिक है। मंत्री मुश्रीफ ने कहा कि इस अतिरिक्त प्लाज्मा का उपयोग हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोगी जीवनरक्षक दवाओं के निर्माण के लिए किया जा सकता है। इसके लिए आवश्यक तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में मरीजों को कम लागत पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। बैठक में चिकित्सा शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति, समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां, गोंदिया जिले में चल रहे परियोजनाओं की स्थिति, चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों में मानव संसाधन की उपलब्धता, दंत चिकित्सा महाविद्यालय तथा सभागार उद्घाटन कार्यक्रमों की रूपरेखा और विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं के विकास जैसे विषयों की भी समीक्षा की गई। चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बैठक में प्रस्तुत सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत तथा मरीज-केंद्रित बनाया जा सके।

