
मुंबई। संभावित एल नीनो के कारण इस वर्ष कम वर्षा की आशंका को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने जल संकट से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि कम समय में पूरे हो सकने वाले सभी जलसंरक्षण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि संभावित एल नीनो संकट को जलसंरक्षण अभियान के अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए। मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम एजेंसियों द्वारा एल नीनो को लेकर जारी चेतावनियों को सरकार गंभीरता से ले रही है और संभावित जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभागों को अभी से तैयार रहना होगा। बैठक में जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन, राधाकृष्ण विखे-पाटील तथा मृदा एवं जलसंरक्षण मंत्री संजय राठोड़ सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने राज्यभर में खराब पड़े कोल्हापुरी बंधारों (चेक डैम) की मरम्मत के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए जलसंरक्षण कार्य शुरू करने के बजाय पहले सभी क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत पूरी की जाए। साथ ही बंधारों को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए धातुरहित एवं स्थायी तकनीक अपनाने की संभावनाएं भी तलाशने के निर्देश दिए। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग को पूर्व के गंभीर सूखाग्रस्त क्षेत्रों का अध्ययन कर वहां अपनाए गए उपायों की रिपोर्ट तैयार करने तथा उसी आधार पर इस वर्ष की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परियोजनाओं को कम समय में पूरा किया जा सकता है, उन्हें तत्काल मंजूरी देकर तेजी से पूरा किया जाए। इसके लिए पाटबंधारे विकास महामंडलों को आवश्यक प्रशासनिक अधिकार भी दिए जाएंगे। फडणवीस ने जलस्रोतों के सुदृढ़ीकरण पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि राज्य में कृषि क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही सौर ऊर्जा व्यवस्था का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने गांव स्तर पर सौर ऊर्जा उपकरणों की मरम्मत के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल सके। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सोलापुर, अहिल्यानगर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे कृषि प्रधान जिलों में बिजली आपूर्ति की समस्या दूर करने के लिए अलग योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि फीडरों पर बढ़ते लोड को कम करने के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे आवश्यकता पड़ने पर एक फीडर से दूसरे फीडर पर बिजली आपूर्ति स्थानांतरित की जा सके और किसानों को निर्बाध बिजली मिल सके। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलसंपदा विभाग के पास 976 तथा मृदा एवं जलसंरक्षण विभाग के पास 1,367 कोल्हापुरी बंधारे हैं। इनकी मरम्मत पूरी होने के बाद राज्य में लगभग 2.39 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित होगी।



