
झांसी, उत्तर प्रदेश। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने सोमवर को बबीना कैंट, झांसी में संचालित आशा स्कूल का निरीक्षण कर वहां विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दी जा रही शिक्षा, प्रशिक्षण, पुनर्वास और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने बच्चों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों और पेंटिंग का अवलोकन किया तथा उनकी प्रतिभा और प्रयासों का उत्साहवर्धन किया। जिलाधिकारी ने कहा कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक शारीरिक या मानसिक स्थिति है। दिव्यांगजनों को संवेदनशीलता के साथ समान अवसर, अधिकार और उचित सम्मान दिए जाने की आवश्यकता है। समाज को उन्हें सहानुभूति या दया की दृष्टि से देखने के बजाय बराबरी का अधिकार और आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपनी क्षमताओं का विकास कर सकें। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज की नई सोच के साथ मुख्यधारा से जोड़ना होगा। उनके अधिकारों और समान भागीदारी का समर्थन करते हुए प्यार, मधुर व्यवहार और सम्मान के माध्यम से उनके भीतर छिपी प्रतिभा को सामने लाने में सहयोग करना चाहिए। खेल, कला, संगीत और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी क्षमताओं को विकसित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। निरीक्षण के दौरान कमांडिंग ऑफिसर अमित दुग्गल ने जिलाधिकारी को आशा स्कूल की गतिविधियों और सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यालय विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी दिव्यांगता की प्रकृति के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं और योग्य शिक्षक उपलब्ध कराता है। पाठ्यचर्या अनुकूलन, व्यक्तिगत सहायता, पुनर्वास चिकित्सा और अभिभावकों की भागीदारी के माध्यम से बच्चों की शिक्षा और समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि आशा स्कूल का मुख्य उद्देश्य जीवन कौशल, सामाजिक कौशल और आजीविका संबंधी प्रशिक्षण के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले प्रत्येक बच्चे की क्षमता को विकसित करना है, ताकि वे अधिक से अधिक आत्मनिर्भर बन सकें और गरिमापूर्ण जीवन जी सकें। विद्यालय बच्चों को उनकी अधिकतम क्षमता के अनुरूप शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने के साथ मुख्यधारा की संस्थाओं में उनके पुनर्वास की संभावनाओं को बेहतर बनाने की दिशा में भी कार्य करता है। वयस्क जीवन में अधिक आत्मनिर्भरता के लिए बच्चों के संचार और सामाजिक कौशल को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाता है। कमांडिंग ऑफिसर अमित दुग्गल ने बताया कि बच्चों की शारीरिक क्षमता में सुधार के लिए उचित फिजियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही मानसिक एवं बौद्धिक क्षमताओं के निरंतर विकास के लिए आवश्यकता के अनुसार विभिन्न चिकित्सा और प्रशिक्षण पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। विद्यालय द्वारा बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया जाता है। इसके अलावा विशेष शिक्षा, चिकित्सा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, खेलकूद, भ्रमण और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जाता है। विद्यालय का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय दिव्यांगजन संस्थान द्वारा निर्धारित पैटर्न पर आधारित है। बच्चों के लिए दिन के भोजन और स्कूल बस की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी गौरांग राठी ने बच्चों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आशा स्कूल के संचालन से जुड़े लोगों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने विद्यालय के संचालन और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करने के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। इस अवसर पर स्टेशन कमांडर एवं कमांडिंग ऑफिसर अमित दुग्गल, बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र कुमार गौड़, प्रधानाचार्य रुचिका दुग्गल सहित शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे।






