
पुणे। नसरापुर (भोर तहसील) में साढ़े तीन साल की बच्ची की निर्मम हत्या के बाद पूरे पुणे जिले में आक्रोश फैल गया है। घटना की भयावहता को देखते हुए बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस के अनुसार, एक 65 वर्षीय आरोपी ने बच्ची पर हमला कर पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी और शव को गोबर के ढेर के नीचे छिपा दिया। राजगढ़ पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया है और उसे 7 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने शुक्रवार रात पुणे–सतारा हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया, जबकि शनिवार को विरोध मार्च निकालकर इलाके में बंद रखा गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आरोपी पर पहले भी ऐसे अपराधों के आरोप लगे थे, लेकिन सबूतों के अभाव में उसे जमानत मिल गई थी। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र दिवस के मौके पर हुई यह घटना राज्य के लिए कलंक है और सवाल उठाया कि क्या अपराधियों में अब कानून का डर नहीं रहा। उन्होंने हाल में चाकन में हुई एक समान घटना का भी जिक्र करते हुए महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई।देशमुख ने ‘महाराष्ट्र शक्ति आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम’ को ऐसे अपराधों के खिलाफ एक सख्त समाधान बताते हुए कहा कि अगर यह कानून लागू होता, तो आरोपी को 21 दिनों के भीतर कड़ी सजा मिल सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 2020 में पारित होने के बावजूद यह कानून अब तक लागू नहीं हो पाया है, क्योंकि इसे केंद्र से अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।उन्होंने नसरापुर और चाकन मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालतों में कराने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर इस कानून को लागू करने पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए सख्त और त्वरित न्याय प्रणाली बेहद जरूरी है।




