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मंदिर जीर्णोद्धार में 60 लाख के घोटाले के आरोपों पर नगर पंचायत का पलटवार

“जब भुगतान ही नहीं हुआ तो भ्रष्टाचार कहां से हुआ?” — ईओ, अध्यक्ष व सभासद ने आरोपों को बताया निराधार

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। बिलेश्वर महादेव मंदिर तालाब के जीर्णोद्धार कार्य में कथित 60 लाख रुपये के भ्रष्टाचार और भुगतान संबंधी आरोपों पर पुरवा नगर पंचायत प्रशासन ने अपना पक्ष रखते हुए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही खबरों के बीच नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी, अध्यक्ष और क्षेत्रीय सभासद ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कार्य के लिए अब तक किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया गया है, इसलिए भ्रष्टाचार या धन के दुरुपयोग का प्रश्न ही नहीं उठता।नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) संदीप कुमार ने कहा कि बिलेश्वर महादेव मंदिर तालाब के जीर्णोद्धार कार्य के संबंध में सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही जानकारी तथ्यहीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य के एवज में अभी तक कोई भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में 60 लाख रुपये के गबन या वित्तीय अनियमितता के आरोप पूरी तरह आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी आधिकारिक जांच या प्रमाण के इस प्रकार की खबरें प्रसारित कर जनता को गुमराह किया जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।नगर पंचायत अध्यक्ष रेनू गुप्ता ने भी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि किसी भी कार्यदायी संस्था को भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्य पूर्ण होने और संबंधित औपचारिकताओं के बाद ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में न तो कोई भुगतान किया गया है और न ही कार्यदायी संस्था मेसर्स संदीप शुक्ला कंस्ट्रक्शन के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों में कोई सच्चाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बिना किसी ठोस प्रमाण के जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।वार्ड संख्या-1 की सभासद ज्योति वर्मा ने बताया कि उनके क्षेत्र में मंदिर जीर्णोद्धार कार्य का प्रस्ताव अवश्य था, लेकिन इसके लिए अब तक कोई धनराशि स्वीकृत या जारी नहीं की गई है। ऐसे में भुगतान और धन के दुरुपयोग से जुड़े आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बिलेश्वर महादेव मंदिर तालाब के जीर्णोद्धार कार्य में लगभग 60 लाख रुपये के कथित घोटाले की चर्चा की जा रही है। हालांकि नगर पंचायत प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बिना भुगतान के भ्रष्टाचार के आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और वास्तविक स्थिति को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पहले उसके आधिकारिक तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें।

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