
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि गैंगस्टर अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई का प्रस्ताव विचाराधीन है और इस पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। राज्य सरकार ने बुधवार को न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ के समक्ष सलेम की याचिका के जवाब में दो हलफनामे पेश किए। सलेम ने अपनी याचिका में दावा किया है कि वह 19 वर्षों से अधिक समय से कारावास में है और अच्छे व्यवहार के आधार पर उसे रिहा किया जाना चाहिए। वकील फरहाना शाह के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि पुर्तगाल से 2005 में प्रत्यर्पित किए जाने के समय भारत ने यह आश्वासन दिया था कि उसे 25 वर्ष से अधिक की सजा या मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा।
सरकारी हलफनामों का विवरण
गृह विभाग के संयुक्त सचिव सुग्रीव धपटे द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि सलेम की याचिका पर राज्य सरकार विचार कर रही है। वहीं, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं जेल महानिरीक्षक सुहास वारके के हलफनामे के अनुसार, समयपूर्व रिहाई के लिए महाराष्ट्र जेल मैनुअल के अंतर्गत सलाहकार बोर्ड और ट्रायल कोर्ट की राय के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा गया है। हालांकि, वारके ने यह भी कहा कि, याचिकाकर्ता का आपराधिक इतिहास अत्यंत गंभीर है। उसने देश में कई अपराध किए हैं और फिर विदेश भाग गया। सरकार ने यह स्पष्ट किया कि सलेम को दो मामलों में दोषी ठहराया गया है और उसे आजीवन कारावास की सजा दी गई है। मार्च 2025 तक वह 19 वर्ष की सजा पूरी कर चुका होगा, लेकिन 25 वर्ष की निर्धारित अवधि अभी शेष है।
याचिका का आधार और तर्क
सलेम की याचिका में कहा गया है कि उसने करीब 12 वर्ष विचाराधीन कैदी के रूप में और 9 वर्ष दोषी के रूप में बिताए हैं। साथ ही उसे 3 वर्ष से अधिक की छूट मिली है। उसके अनुसार, 2024 के अंत तक उसने कुल 24 वर्ष और 9 महीने की सजा पूरी कर ली होगी। हालांकि, सरकार का पक्ष है कि 25 वर्ष की अवधि की गणना गृह विभाग के अंतिम निर्णय के बाद ही तय की जाएगी। अबू सलेम ने यह याचिका 10 दिसंबर 2024 को टाडा अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की थी। पीठ ने मामले की सुनवाई जून में करना तय किया।




