
मुंबई। महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान 36,211 कंपनियों का पंजीकरण समाप्त होने या बंद होने का मामला सामने आया है। यह जानकारी केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। इस खुलासे के बाद राज्य में रोजगार, उद्योग और निवेश के माहौल को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। लोकसभा में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद राजाभाऊ वाजे के प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच महाराष्ट्र में कुल 36,211 कंपनियों के नाम कंपनी रजिस्टर से हटाए गए या वे बंद हो गईं। आंकड़ों के अनुसार, मुंबई सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 12,009 कंपनियां बंद हुईं। इसके बाद पुणे में 6,433, ठाणे में 4,704, नागपुर में 1,478, नाशिक में 840, रायगढ़ में 822 और छत्रपति संभाजीनगर में 654 कंपनियां बंद हुईं। कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर समेत अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में कंपनियों का संचालन बंद हुआ।क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिजनेस सर्विसेज सबसे अधिक प्रभावित रही, जहां 14,613 कंपनियां बंद हुईं। इसके अलावा विनिर्माण और खनन क्षेत्र में 6,582, व्यापार क्षेत्र में 4,196 तथा निर्माण क्षेत्र में 2,356 कंपनियां बंद होने की जानकारी सामने आई।इस मुद्दे पर विपक्ष ने राज्य सरकार की औद्योगिक नीति और रोजगार सृजन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में कंपनियों के बंद होने से युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं और उद्योगों के पलायन की आशंका बढ़ी है। हालांकि, उद्योग मंत्री उदय सामंत ने इन आंकड़ों को लेकर अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि जिन कंपनियों के नाम हटाए गए, उनमें बड़ी संख्या ऐसी कंपनियों की थी जो लंबे समय से निष्क्रिय थीं या आवश्यक वैधानिक दस्तावेज जमा नहीं कर रही थीं। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र से किसी बड़े उद्योग का पलायन नहीं हुआ है और यह प्रक्रिया कंपनी कानून के तहत नियमित प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा है।फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल, आसान नियम, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। क्योंकि किसी भी कंपनी के बंद होने का असर केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे जुड़े कर्मचारियों, उनके परिवारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। महाराष्ट्र लंबे समय से देश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र रहा है। ऐसे में बंद कंपनियों की बढ़ती संख्या राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती मानी जा रही है। अब उद्योग जगत और युवाओं की नजर इस बात पर है कि सरकार नए निवेश के साथ-साथ मौजूदा उद्योगों को भी किस तरह मजबूती प्रदान करती है।

