
मुंबई। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की नई नीति के तहत अब बड़े वाणिज्यिक और आवासीय प्रोजेक्ट सीधे मेट्रो स्टेशनों से जुड़ सकेंगे। इसके लिए संबंधित डेवलपर को एकमुश्त, गैर-वापसी योग्य (नॉन-रिफंडेबल) डेवलपमेंट फीस का भुगतान करना होगा और पैदल यात्री पुल (FOB) के निर्माण का पूरा खर्च भी स्वयं वहन करना होगा।
एमएमआरडीए की नीति के अनुसार, आवेदनकर्ता को एफओबी के डिजाइन और निर्माण की पूरी लागत के साथ निर्माण लागत का छह प्रतिशत अतिरिक्त राशि सुपरविजन शुल्क के रूप में जमा करनी होगी। किसी भी प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले उसकी तकनीकी, संरचनात्मक और सुरक्षा संबंधी विस्तृत जांच की जाएगी। इसी नीति के तहत गोदरेज एंड बॉयस ने एमएमआरडीए को 10 करोड़ रुपये की एकमुश्त नॉन-रिफंडेबल डेवलपमेंट फीस जमा की है। कंपनी एफओबी के निर्माण का पूरा खर्च भी वहन करेगी। गोदरेज एंटरप्राइजेज एस्टेट्स डिवीजन के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एवं बिजनेस हेड अनूप मैथ्यू ने एमएमआरडीए के महानगरीय आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी को इस संबंध में चेक सौंपा। एमएमआरडीए के अधिकारियों के अनुसार, इसी मॉडल को पहले ओबेरॉय मॉल को मेट्रो स्टेशन से सीधे जोड़ने में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जिससे यात्रियों को मुख्य सड़क पर आए बिना सीधे मेट्रो स्टेशन से मॉल तक पहुंचने की सुविधा मिली। प्राधिकरण वर्तमान में ऐसे कई अन्य प्रस्तावों की भी समीक्षा कर रहा है। इनमें मेट्रो लाइन-2बी पर भारत डायमंड बोर्स को सीधे जोड़ने का प्रस्ताव भी शामिल है। मंजूरी मिलने पर प्रतिदिन करीब 40 हजार यात्रियों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। इससे आसपास की सड़कों पर पैदल यात्रियों की भीड़ कम होगी और मेट्रो के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार की यह नीति ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी, मेट्रो में यात्रियों की संख्या बढ़ेगी और डेवलपमेंट फीस व गैर-किराया (नॉन-फेयर) आय के माध्यम से मेट्रो नेटवर्क की आर्थिक मजबूती भी सुनिश्चित होगी। उपमुख्यमंत्री एवं एमएमआरडीए के अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने कहा कि इस नीति को वाणिज्यिक और आवासीय परियोजनाओं से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रस्ताव को तकनीकी और सुरक्षा मानकों पर परखा जाता है तथा यह पहल यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ मेट्रो नेटवर्क की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को भी मजबूत करेगी। एमएमआरडीए के महानगरीय आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी ने कहा कि लास्ट माइल कनेक्टिविटी सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। इस पहल के माध्यम से बड़े वाणिज्यिक एवं आवासीय परिसरों को मेट्रो स्टेशनों से जोड़ा जा रहा है, जबकि इसका खर्च संबंधित संस्थानों द्वारा वहन किया जाएगा। इससे यात्रियों का सफर अधिक सुविधाजनक होगा, मेट्रो का उपयोग बढ़ेगा और मेट्रो नेटवर्क को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।

