
मुंबई। महाराष्ट्र में आम नागरिकों तक बेहतर और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की निगरानी और जनभागीदारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विभिन्न स्वास्थ्य समितियों को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया है। रविवार को सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने राज्य में कार्यरत रुग्ण कल्याण समिति (आरकेएस), जन आरोग्य समिति (जेएएस), महिला आरोग्य समिति (एमएएस) और ग्राम आरोग्य पोषण व स्वच्छता समिति (वीएचएनएससी) के पुनर्जीवन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन समितियों की भूमिका नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्री आबिटकर ने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में इन समितियों की अहम भूमिका होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में वीएचएनएससी और शहरी क्षेत्रों में एमएएस स्वच्छता, पोषण, पेयजल और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर कार्य करती हैं, जबकि जेएएस और आरकेएस स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करती हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर कार्यरत समितियों में सरपंच, महिला सदस्य, स्वयं सहायता समूह, युवा मंडल, सामाजिक संस्थाएं, गर्भवती महिलाएं और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले चुके नागरिकों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन हो सके। शहरी क्षेत्रों की महिला आरोग्य समितियों में झोपड़पट्टी क्षेत्रों की सक्रिय और नेतृत्व क्षमता वाली महिलाओं को शामिल करने पर जोर दिया गया है। वहीं, जन आरोग्य समितियों में जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। मंत्री आबिटकर ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इन समितियों की नियमित बैठकें, प्रशिक्षण और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जरूरी है। स्थानीय समस्याओं की पहचान कर त्वरित समाधान निकालने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर नागरिकों का विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और सशक्त बनाया जा सकता है।




