
एसआरए के फैसलों से बदलेगी मुंबई के विकास की नई तस्वीर
मुंबई। झोपडपट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ) डॉ. महेंद्र कल्याणकर के नेतृत्व में झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्रक्रिया में बड़े और संरचनात्मक सुधार देखने को मिल रहे हैं। इन सुधारों का उद्देश्य मुंबई को झोपड़पट्टी मुक्त बनाना और झोपड़पट्टी धारकों को उनके हक का सुविधायुक्त आवास उपलब्ध कराना है।
मुंबई को वैश्विक स्तर पर विकसित शहर बनाने की परिकल्पना, जिसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लंबे समय से व्यक्त करते रहे हैं, तभी साकार हो सकती है जब शहर में झोपड़पट्टी समस्या का स्थायी समाधान हो। इसी दिशा में एसआरए के सीईओ डॉ. महेंद्र कल्याणकर ने तकनीक और पारदर्शिता पर आधारित कई अहम कदम उठाए हैं। सबसे प्रमुख पहल के रूप में शहर की सभी झोपड़ियों का डिजिटल मैपिंग किया जा रहा है, जिससे पात्रता निर्धारण अधिक सटीक और पारदर्शी होगा। इसके साथ ही, नए अतिक्रमणों पर निगरानी के लिए ‘नेत्रम (NETRAM)’ प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है, जो उपग्रह चित्रों के माध्यम से अवैध निर्माणों की पहचान करता है। प्रशासनिक स्तर पर एसआरए की लगभग 22 सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे नागरिकों और डेवलपर्स को मंजूरी प्रक्रिया में तेजी मिली है। फाइल ट्रैकिंग और रिकॉर्ड की सुरक्षा के लिए ब्लॉकचेन तकनीक तथा नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए एआई आधारित चैटबॉट्स भी लागू किए गए हैं। नीतिगत सुधारों के तहत, लंबित परियोजनाओं को गति देने के लिए 45 दिनों के भीतर निष्कासन की मानक कार्यप्रणाली (SOP) लागू की गई है। साथ ही, महाराष्ट्र सरकार द्वारा पात्र झोपड़ीधारकों के लिए आवास का आकार 269 वर्ग फुट से बढ़ाकर 300 वर्ग फुट कर दिया गया है, जिसे अब पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। जो पुनर्वसन नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
डेवलपर्स के लिए भी स्व-प्रमाणन (Self-Certification) और हप्ते आधारित नीति (Instalment Policy) जैसे सुधार लागू किए गए हैं, ताकि परियोजनाओं की गति बढ़ाई जा सके और निवेश को प्रोत्साहन मिले।
इसी क्रम में, उन विकासकों के खिलाफ सख्ती बढ़ाई गई है जो झोपड़पट्टी धारकों को समय पर भाड़ा (Rent) नहीं दे रहे हैं। इसके लिए एसआरए ने ऑनलाइन शिकायत प्रक्रिया लागू की है, जिससे प्रभावित नागरिक सीधे शिकायत दर्ज कर सकते हैं। साथ ही, विकासकों को एडवांस भाड़ा (Advance Rent) समय पर देने के सख्त निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि पुनर्वसन के दौरान किसी भी परिवार को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। इसी उद्देश्य से मेंटेनेंस फंड (Corpus Fund) को लेकर भी बदलाव प्रस्तावित हैं। वर्तमान में प्रति लाभार्थी ₹40,000 जमा करना अनिवार्य है, जिसे बढ़ाकर ₹1 लाख से ₹3 लाख तक करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि पुनर्वसन इमारतों का दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित हो सके और झोपड़पट्टी धारकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों से एसआरए परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, अतिक्रमण पर नियंत्रण मजबूत होगा और मुंबई में पुनर्वसन प्रक्रिया को नई गति मिलेगी।




